धर्मभारत

 महाशिवरात्रि महापर्व पर सिद्धपीठ हथियाराम मठ में उमड़ा आस्था का सागर, वैदिक मंत्रों से गूंजा शिवधाम

बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर।

आज दिनांक।15/02/026को

महाशिवरात्रि महापर्व पर सिद्धपीठ हथियाराम मठ में उमड़ा आस्था का सागर, वैदिक मंत्रों से गूंजा शिवधाम

गाजीपुर। महाशिवरात्रि के पावन महापर्व पर जखनिया क्षेत्र स्थित प्राचीन एवं चमत्कारी तपोभूमि में अद्वितीय आध्यात्मिक उत्सव का भव्य आयोजन हुआ। शिवभक्ति, साधना और सनातन परंपरा के इस महापर्व ने पूरे मठ परिसर को शिवमय बना दिया। ‘हर-हर महादेव’ और वैदिक ऋचाओं के गगनभेदी स्वर से वातावरण दिव्यता से आलोकित हो उठा।महाशिवरात्रि की पावन बेला पर काशी के विख्यात वैदिक विद्वान आचार्य सुरेश चंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में 51 आचार्यों द्वारा असंख्य पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया। तत्पश्चात वेद मंत्रों, रुद्रसूक्त एवं महामृत्युंजय जाप के मध्य विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन और रुद्राभिषेक सम्पन्न हुआ।शास्त्रों में वर्णित है कि महाशिवरात्रि की रात्रि में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण एवं पूजन करने से साधक के मन, वचन और कर्म शुद्ध होते हैं तथा उसे अक्षय पुण्य और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने उपवास, जप, तप और रात्रि जागरण कर भगवान भोलेनाथ से विश्व कल्याण की कामना की।सिद्धपीठ हथियाराम मठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह साधना, तपस्या और सिद्ध परंपरा की जीवंत धरोहर है। जनश्रुति है कि यहां अनेक सिद्ध संतों ने घोर तप कर शिवकृपा प्राप्त की। यह मठ क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख धाम माना जाता है।मठ की दिव्य परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां विशेष अनुष्ठान का महत्व और भी बढ़ जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।महामंडलेश्वर महंथ भवानी नंदन यति महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्म जागरण, आत्मशुद्धि और शिवत्व को आत्मसात करने का दिव्य अवसर है।उन्होंने कहा कि शिव ही सृष्टि के आधार हैं। शिव का स्मरण मात्र करने से जन्म-जन्मांतर के पाप क्षीण होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप एवं ध्यान का विशेष महत्व है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि शिवभक्ति को जीवन का आधार बनाकर समाज में धर्म, सद्भाव और संस्कारों की ज्योति प्रज्ज्वलित रखें।पूरे आयोजन के दौरान मठ परिसर दीपों की ज्योति, धूप-दीप की सुगंध और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने रात्रि भर भजन-कीर्तन, पूजन और ध्यान कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, शांति और मानव कल्याण की प्रार्थना की।इस अवसर पर ग्वालियर के आचार्य शंभूनाथ पाठक, लौटू प्रजापति, पुजारी सर्वेश चंद्र पांडे, चित्रसेन पांडे, मनोज पांडे, अजय पांडे, सज्जन त्रिपाठी, संजय पांडे तथा पुजारी अभयानंद यति सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।महाशिवरात्रि के इस दिव्य आयोजन ने सिद्धपीठ हथियाराम मठ की आध्यात्मिक महिमा को पुनः जनमानस में प्रतिष्ठित कर दिया। सचमुच, यह पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शिवत्व की अनुभूति, भक्ति की पराकाष्ठा और आत्मा के जागरण का पावन महोत्सव है।

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