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चौथा स्तंभ खतरे में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा,देशभर में पत्रकार असुरक्षित, फिर भी पत्रकार सुरक्षा कानून क्यों नदारद है।

चौथा स्तंभ खतरे में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा,देशभर में पत्रकार असुरक्षित, फिर भी पत्रकार सुरक्षा कानून क्यों नदारद है।

नई दिल्ली/ राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाला पत्रकारिता जगत आज सबसे अधिक असुरक्षा और उपेक्षा का शिकार दिखाई दे रहा है। वर्षों से देशभर में पत्रकार संगठनों का गठन हो रहा है। आंदोलन हो रहे हैं। ज्ञापन दिए जा रहे हैं। लेकिन पत्रकार सुरक्षा कानून आज भी सिर्फ मांग बनकर रह गया है।यह एक कटु सत्य है। कि जब कोई पत्रकार सच दिखाता है। सवाल पूछता है। या सत्ता और प्रशासन की नाकामियों को उजागर करता है। तो वही पत्रकार हमलों, धमकियों, झूठे मुकदमों और उत्पीड़न का शिकार बन जाता है। इसके बावजूद सरकारें चुप हैं।

सब कुछ ठीक है। तो पत्रकारों के लिए कानून क्यों नहीं?

सरकारें बार-बार यह दावा करती हैं। कि देश में कानून-व्यवस्था बेहतर है। प्रशासन सजग है। और लोकतंत्र सुरक्षित है।तो फिर सवाल उठता है।पत्रकारों के लिए अब तक पत्रकार सुरक्षा कानून क्यों लागू नहीं हुआ?क्या सत्ता को सवाल पूछने वाले पत्रकारों से डर लगने लगा है।या फिर सरकारें चाहती हैं। कि चौथा स्तंभ कमजोर हो जाए, ताकि मनमानी आसान हो सके।क्या सच लिखना सबसे बड़ा अपराध बन गया है।आज हालात यह हैं। कि सच लिखने वाला पत्रकार असुरक्षित है।भ्रष्टाचार उजागर करने वाला पत्रकार निशाने पर है।प्रशासन से सवाल पूछने वाला पत्रकार आरोपी बना दिया जाता है।लेकिन हमला करने वालों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि सवाल उठाने वालों पर दबाव बनाया जाता है।

चौथे स्तंभ को धराशाई करने की साजिश।

देश के लोकतांत्रिक ढांचे में मीडिया की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी है। अगर यही रीढ़ कमजोर कर दी गई, तो लोकतंत्र सिर्फ नाम का रह जाएगा।यह आशंका अब गहराने लगी है। कि पत्रकार सुरक्षा कानून को टालना कहीं जानबूझकर तो नहीं किया जा रहा,अब भी नहीं जागी सरकार तो इतिहास सवाल पूछेगा,यह सिर्फ पत्रकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र को जीवित रखने की लड़ाई है।अगर आज पत्रकार सुरक्षित नहीं है। तो कल आम नागरिक की आवाज़ भी सुरक्षित नहीं रहेगी।अब समय आ गया है। कि सरकार और प्रशासन जवाब दें।क्या पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र के लिए ज़रूरी नहीं या फिर चौथे स्तंभ को कमजोर करना ही नई नीति बन चुकी है।

पत्रकार चुप नहीं रहेगा

सच लिखना अपराध नहीं है।पत्रकार सुरक्षा कानून अब टालने का नहीं, लागू करने का वक्त है।

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