लखनऊ बिजली बिल राहत योजना में कीर्तिमान बनाने वाले 41 इंजीनियर, कर्मी होंगे सम्मानित

लखनऊ बिजली बिल राहत योजना में कीर्तिमान बनाने वाले 41 इंजीनियर, कर्मी होंगे सम्मानित
गणतंत्र दिवस समारोह में मध्यांचल निगम की एमडी रिया केजरीवाल आज देंगी प्रशस्ति पत्र
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की की तरफ से गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिजली के 41 मेहनतकश इंजीनियरों एवं कर्मियों का सोमवार को सम्मान मिलेगा। इनमें दो अधीक्षण अभियंता (एसई ), 11 अधिशासी अभियंता (एक्सईएन ), 5 सहायक अभियंता ( एई ), 3 जूनियर इंजीनियर (जेई ), दो बिजली सखी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी ने बिजली बिल राहत योजना में बकाया बिल वसूल और खराबी मीटरों को बदलकर कीर्तिमान बनाया है। मध्यांचल निगम की एमडी रिया केजरीवाल सोमवार को गोखले मार्ग स्थित मुख्यालय पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगी। इनमें बहराइच के एसई रामयश यादव, बरेली के एसई ज्ञानेंद्र सिंह, एक्सईएन में अजय कुमार कनौजिया संडीला हरदोई, रमेश कुमार हैदरगढ़ बाराबंकी,घनश्याम त्रिपाठी बाराबंकी शहर, अनुभव कुमार नानपारा बहराइच, जगेश कुमार कैसरगंज बहराइच, भजन लाल शाहबाद हरदोई, दयाशंकर यादव लालगंज रायबरेली, राजेश कुमार तुलसीपुर बहराइच, नागेंद्र सिंह बदायूं, केके शर्मा बदायूं
टेस्ट, संजय कुमार अंबेडकरनगर टेस्ट हैं। एई में सौरभ शुक्ला जलालाबाद शाहजहांपुर, योगेंद्र बजाज कैसरगंज, कुलदीप सिंह बिसवां सीतापुर, विशाल श्रीवास्तव पीलीभीत मीटर, सौरभ परिहार बदायूं मीटर व जेई में सुनील वर्मा कैसरगंज, विकास शुक्ला फतेहपुर बाराबंकी और अभिनव शुक्ला बिसवां सीतापुर शमिल हैं।
बिजली सखियों में नाजमीन बानो ने जमा किए 6036 बिलएमडी बाराबंकी की दो बिजली सखियों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान देंगी, जिनमें नाजमीन बानो व राजश्री शुक्ला शामिल हैं। एक दिसंबर से 20 जनवरी तक 51 दिन में नाजमीन बानो ने 6036 और राजश्री शुक्ला ने 5944 बिल जमा करके जिले में अपना नाम रोशन किया।
लखनऊ की फौज कर रही मौजराजधानी लखनऊ के इंजीनियरों एवं कर्मियों की फौज बिजली बिल राहत योजना में कोई उल्लेख काम नहीं किया, जिससे प्रशस्ति पत्र के लिए चयन हो पाता। लंबेअरसे के बाद राजधानी के इंजीनियरों को गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र न मिलने से चौतरफा किरकिरी हो रही है। जबकि इसी राजधानी में सबसे ज्यादा प्रशस्ति पर यहां के इंजीनियरों के खाते में आते थे। लग रहा यहां की फौज मौज कर रही है।


