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गोदसईया में कोटा चयन की गूंज: प्रशासन की सख्ती, आजीविका समूह को मिली पहली वरीयता, भारी पुलिस फ़ोर्स के साथ ही ग्रामीणों का उमड़ा जन सैलाब

बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर।

आज दिनांक।11/01/026को

गोदसईया में कोटा चयन की गूंज: प्रशासन की सख्ती, आजीविका समूह को मिली पहली वरीयता, भारी पुलिस फ़ोर्स के साथ ही ग्रामीणों का उमड़ा जन सैलाब

दुल्लहपुर, गाजीपुर।जखनिया विकासखंड अंतर्गत गोदसईया गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान (कोटा) को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच प्रशासन ने पारदर्शिता और शांति का संदेश देते हुए अहम कदम उठाया। गांव के कंपोजिट विद्यालय परिसर में आज आजीविका मिशन समूह को प्रथम वरीयता देते हुए कोटे के लिए आवेदन की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।पूर्व कोटेदार मो. इस्लाम के निधन के बाद से कोटा निरस्त चल रहा था, जिसे लेकर गांव में आरोप–प्रत्यारोप और तू–तू मैं–मैं का माहौल बना हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से निस्तारित करने की पहल की। सैकड़ों ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूहों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई गई।गांव में कुल 10 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 7 अनुसूचित जाति, 2 पिछड़ा वर्ग और 1 अन्य वर्ग से संबंधित हैं। कोटा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के कारण एससी समूहों को प्राथमिकता दी गई। इस क्रम में चार स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन प्रस्तुत किया—शांति स्वयं सहायता समूह, सैयद बाबा स्वयं सहायता समूह, वैष्णवी स्वयं सहायता समूह एवं संत रविदास स्वयं सहायता समूह।खंड विकास अधिकारी भीमराव प्रसाद ने स्पष्ट किया कि उप जिलाधिकारी के निर्देशानुसार वरीयता क्रम के आधार पर आगे की घोषणा की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया के लिए एक घंटे का निर्धारित समय दिया गया था।इस अवसर पर पूर्ति अधिकारी गोविंद सिंह, एडीओ पंचायत अजय मिश्रा, थानाध्यक्ष कमलेश कुमार, ग्राम सचिव पवन मिश्रा सहित संजय सक्सेना, राम जन्म सिंह, भानु प्रताप सिंह, प्रधान राकेश यादव भुल्लन, लक्ष्मण सिंह, मोनू यादव, सोनू यादव, जेपी राम, अखिलेश राम तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रशासन की सजगता और पारदर्शी कार्यशैली से विवादित मामलों का भी शांतिपूर्ण समाधान संभव है, और गांव में कानून–व्यवस्था व सामाजिक सौहार्द कायम रखा जा सकता है।

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