ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद भी 30 दिन तक वैध, हाईकोर्ट का आदेश- बीमा कंपनी को देना होगा हर्जाना

ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद भी 30 दिन तक वैध, हाईकोर्ट का आदेश- बीमा कंपनी को देना होगा हर्जाना
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर होने पर तुरंत अवैध नहीं हो जाता और 30 दिनों तक लागू रहता है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता उसकी एक्सपायरी डेट (मियाद खत्म होने की तारीख) के साथ ही खत्म नहीं हो जाती। मोटर वाहन कानून के तहत लाइसेंस की मियाद खत्म होने के बाद भी 30 दिनों की एक वैधानिक ग्रेस पीरियड मिलता है, जिसके दौरान लाइसेंस प्रभावी माना जाता है। इस अवधि में अगर कोई दुर्घटना होती है, तो बीमा कंपनी केवल इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकती कि लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था।यह भी पढ़ें – Year Ender 2025: साल 2025 में भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली 10 कारें, कार बाजार की बदली तस्वीर, लेकिन ट्रेंड वही रहा
क्या था मामलायह मामला हरियाणा के जींद जिले में 4 जुलाई 2001 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया था और बीमा कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। बीमा कंपनी को ड्राइवर से रकम वसूलने का अधिकार भी नहीं दिया गया था।बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि ड्राइवर का लाइसेंस 4 जून 2001 को एक्सपायर हो गया था, जबकि दुर्घटना 4 जुलाई 2001 को हुई। लाइसेंस का नवीनीकरण बाद में 6 अगस्त 2001 को किया गया था, इसलिए कंपनी के अनुसार ड्राइवर वैध लाइसेंस के बिना वाहन चला रहा था।
हाईकोर्ट ने क्या कहाहाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 14 के तहत लाइसेंस की एक्सपायरी के बाद 30 दिनों का वैधानिक ग्रेस पीरियड मिलता है। इस मामले में लाइसेंस 4 जून 2001 को समाप्त हुआ था और ग्रेस पीरियड 5 जून से शुरू होकर 4 जुलाई 2001 की आधी रात तक लागू था। दुर्घटना 4 जुलाई को सुबह करीब 10:45 बजे हुई, जो पूरी तरह से इस ग्रेस पीरियड के भीतर थी। ऐसे में लाइसेंस को दुर्घटना के समय वैध माना जाएगा।
बीमा कंपनी को राहत क्यों नहीं मिलीकोर्ट ने माना कि ग्रेस पीरियड का मकसद ही यही है कि ड्राइवरों और दुर्घटना पीड़ितों को तकनीकी देरी के कारण नुकसान न उठाना पड़े। चूंकि कानून खुद इस अवधि में लाइसेंस को प्रभावी मानता है, इसलिए बीमा कंपनी यह नहीं कह सकती कि पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। इसी वजह से बीमा कंपनी को मुआवजा देने से बचने या ड्राइवर से रिकवरी का अधिकार नहीं दिया गया।



