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‘शह-मात’ के ‘खेल’ में ‘गच्चा’ खा गए ‘महाराज’

‘शह-मात’ के ‘खेल’ में ‘गच्चा’ खा गए ‘महाराज’

बचाव में लगे कई सत्ताधारी पर हर हथकंडा हो रहा फेल!

सत्ता से जुड़े एक बड़े नेता की करवरिया बंधु से अनबन भी बन रही तबाही का बड़ा कारण!

एक तीर से कई निशानें लगाने वाले कई हैं राजदार!

एक विधायक के सहयोग से पूर्व ब्लाक प्रमुख ने दिखाई अपनी ताकत तो तिलमिला गई पूरी भाजपा!

ऊपर से घनघनाया फोन तो संतोष को खोजी कुत्तों की तरह ढूंढने लगी पुलिस!

महाराज पर कार्रवाई से कुछ लोग खफा तो एक बड़ा धड़ा खुश भी!

बुरे वक्त ने घेरा तो काम नहीं आ रहा पावर पैसा और रुतबा!

कुर्सी को लेकर भिड़े दो रसूखदार,एक की चाल असरदार तो दूसरे की हो रही बेअसर!

असोथर विकास खंड के सरकंडी गांव में विकास कार्यों के लिए आए सरकारी धन में भ्रष्टाचार की हुई शिकायत के बाद कुर्सी की लड़ाई वर्चस्व की जंग में परिवर्तित हो जाएगी शायद इसका अनुमान ना तो शिकायतकर्ताओं को रहा होगा और ना ही सरकंडी की बागडोर संभालने वाले संतोष द्विवेदी को। शिकायत,जांच एवं कार्रवाई के बीच लड़ाई कब मान,प्रतिष्ठा की पहुंच गई सहसा इसका अंदाजा लोग लगा ही नहीं पाए। सरकंडी के बढ़े पारे से जिले के अफसर भी भौचक्के हैं।भारतीय जनता पार्टी का एक बड़ा खेमा प्रधान पति के साथ खड़ा नजर आ रहा है और उनको बचाने के हर संभव प्रयत्न कर रहा है लेकिन पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी के साथ हुई तल्खी इस कदर बढ़ी कि अब लड़ाई से मान,सम्मान,स्वाभिमान और प्रतिष्ठा धूल धूसरित रही है।भ्रष्टाचार की आड़ में शह-मात के शुरू खेल में सरकंडी के ‘महाराज’ गच्चा खा गए। उन्हें विरोधी खेमा पूरी तरह से घेरकर मिट्टी में मिलाने को बेताब दिख रहा है। प्रधान के जेल जाने के बाद मामला और गरमा गया है।पति संतोष पुलिस की निगाहों से बचते-बचाते सत्ताई मददगारों की शरण में पहुंच चुके हैं। फिलहाल पुलिस की टीमें उन्हें खोज रहीं हैं।
यूं तो फतेहपुर जनपद के 13 विकास खंडों की 816 ग्राम पंचायतों में सरकारी खजाने की लूट कोई आम नहीं है।मनरेगा सहित राज्य वित्त,15वें वित एवं अन्य विकासकारी योजनाओं के लिए दिए जाने वाले धन का बंदरबांट किस तरह से हो रहा है उसका अंदाजा गांवों की बदरंग तस्वीरों से लगाया जा सकता है।सरकंडी का भ्रष्टाचार इन दिनों शीर्ष सुर्खियों में है।मनरेगा की लूट एवं आवास देने के बदले धन लेने की शिकायत के बाद जांच का जो सिलसिला शुरू हुआ वह बदस्तूर जारी है लेकिन इसी बीच भ्रष्टाचार के दर्ज मुकदमें में तफ्तीश के दौरान ग्राम प्रधान पुष्पा द्विवेदी को आरोपित कर घर से गिरफ्तारी करके जेल भेज देने के बाद से मामला और गरमा गया है। संतोष द्विवेदी स्वयं भाजपा में हैं।बेटा भाजयुमो का पदाधिकारी है। सत्ता से जुड़े लोगों की खैर खुशामद करने वाले संतोष द्विवेदी को पार्टी ने ही बुरे समय में सहारा नहीं दिया। या यूं कहा जाए संतोष द्विवेदी के विरोध में खड़े पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी की चालों के आगे किसी की चल नहीं पा रही है। फर्श से लेकर अर्श तक का शुरू हुआ संतोष का सफर एक बार फिर से फर्श की ओर ही चल पड़ा है।कार्रवाई की जद में लाकर उन्हें विरोधियों ने चारों तरफ से घेर लिया है। महाराज को बचाव की तिलमिलाहट एवं बेचैनी से फिलहाल राहत दिलाने वाला कोई भी भगवाधारी नजर नहीं आ रहा है भाजपा के एक पूर्व अध्यक्ष ने तो सोशल मीडिया अकाउंट पर ही लिख दिया कि कार्यकर्ता दरी बिछाता है,वोट मांगता है,बूथ पर लगता है लेकिन उसकी समय पर मदद न होने से हौसला गिरता है। दूसरे दल के लोग पार्टी के लिए वोट नहीं मांगते।
पूर्व अध्यक्ष का यह इशारा संतोष द्विवेदी के विरोध में खड़े दूसरे दल के विधायक की ओर है।संतोष को फर्श में लाकर उनकी हस्ती को मिटाने का मंसूबा पालने वाले हर हथकंडा अपना रहे हैं लेकिन यहां कयास इस बात के लगाए जा रहे हैं कि आखिर कभी खाकी के भी आंखों के तारे रहे सरकंडी के महाराज पुलिस की आंखों की एकाएक किरकिरी क्यों बन गए?कई मायने निकाले जा रहे हैं। संतोष द्विवेदी को पूरे ताम-झाम से करवरिया बंधु के साथ एक मौरंग खदान का भूमि पूजन कर अपनी ताकत का एहसास कराना भी भारी पड़ गया।बताते हैं कि सत्ता से जुड़े एक बड़े नेता की करवरिया बंधुओं से अनबन है और विरोधियों ने इसे ही ढाल बनाकर जो प्रस्तुतिकरण दिया वह संतोष की हस्ती को ठिकाने लगाने के लिए काफी रहा। बताया गया महाराज का वर्चस्व जिले से लेकर कौशांबी तक बढ़ता जा रहा है। चुनाव के समय सत्ता विरोधी गतिविधियां करने की बातों को भी सच के आइने में उतारने में विरोधी सफल हो गए। उधर पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी की सत्ताधारी एक विधायक से नजदीकी एवं मदद जगजाहिर है लेकिन पर्दे के पीछे सत्ता से ही जुड़े कई ऐसे मोहरे हैं जो संतोष द्विवेदी को धूल में मिलता देखने की खुशी ढूंढ रहे हैं हलांकि संतोष के समर्थन में भी संगठन के कई नेता एवं जनप्रतिनिधि लगे रहे।जिले के अफसरों से लेकर सत्ता के गलियारों तक कोई बचा नहीं जिसकी गणेश परिक्रमा ना की गयी हो लेकिन मदद की आस फिलहाल कहीं से नजर नहीं आ रही। स्वयं सरकंडी के महाराज ने भी सारे अस्त्र-शस्त्र आजमाने के बाद सत्ता से जुड़े हुक्मरानों के सामने डेरा डाल दिया है।एक तीर से कई निशानें लगाने के शुरू हुए नए खेल के फंद में फंसे प्रधान पति संतोष द्विवेदी अपने बचने के रास्ते ढूंढ रहे हैं तो पुलिस उन्हें हर संभावित जगह में खोज रही है। आपसी द्वंद्व एवं वर्चस्व की शुरू हुई जंग में शह-मात के खेले जा रहे खेल में सरकंडी के महाराज बुरी तरह से फंस गए हैं।

Balram Singh
India Now24

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