
बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाजीपुर।
आज दिनांक।10/12/025को
जिलाधिकारी के निर्देशन में RBSK टीमों ने बढ़ाया कदम, जन्मजात दोषों वाले बच्चों का निःशुल्क उपचार जारी

गाजीपुर।जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के 16 ब्लॉकों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत 32 टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ये टीमें 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनके उपचार की व्यवस्था करती हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में जन्मजात दोष, बीमारियों, पोषण की कमी तथा विकास में देरी जैसे लक्षणों की जांच की जाती है। पहचाने गए मामलों को जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाएं एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।इसी क्रम में मनिहारी ब्लॉक की RBSK टीम ने 04 नवंबर 2025 को सिखड़ी ग्रामसभा में कृतिका कुमारी (पुत्री कमलेश यादव, उम्र 5 माह) को होठ कटे जन्मजात दोष से ग्रसित पाया, जिसका सफल उपचार 11 नवंबर 2025 को हेरिटेज अस्पताल वाराणसी में कराया गया। बच्ची अब पूर्णतः स्वस्थ है।सुभाकरपुर ब्लॉक में 13 नवंबर की विजिट में अर्पिता कुमारी (पुत्री श्याम सुंदर, ग्राम जल्लापुर, उम्र 5 वर्ष 6 माह) को हृदय रोग से ग्रसित पाया गया। जिला अस्पताल से रेफर होने के बाद अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में उसका उपचार जारी है।भरौली ग्रामसभा में 1 नवंबर 2021 की जांच के दौरान आयांश कुमार (पुत्र राजू बिंद) होठ-तालु कटे दोष के साथ मिला, जिसका सफल ऑपरेशन 8 नवंबर 2021 को हेरिटेज अस्पताल वाराणसी में किया गया। बच्चा अब पूर्णतः स्वस्थ है।देवकली ब्लॉक के रसूलपुर पचरासी ग्रामसभा में टीम ने 31 जुलाई 2025 को आरोही कुमारी (पुत्री दशरथ, उम्र 2 वर्ष) को न्यूरल ट्यूब जन्मजात दोष से ग्रसित पाया। 4 अक्टूबर 2025 को झांसी मेडिकल कॉलेज में सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। बच्ची के स्वस्थ होने पर पिता दशरथ ने स्वास्थ्य टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।जनपद के सभी ब्लॉकों में RBSK टीमें लगातार ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके उपचार हेतु ठोस कदम उठा रही हैं।विभाग के डीपीएम ने बताया कि RBSK के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की ‘4D’ — जन्मजात दोष, रोग, कमी और विकास में देरी — की जांच की जाती है। गंभीर मामलों में बच्चों को तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। सभी उपचार, जिसमें सर्जरी भी शामिल है, निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन हेतु आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों के सहयोग से मजबूत तालमेल स्थापित किया गया है।



