नियत तिथि पर ऑनलाइन स्वीकृत होने वाले चयन वेतन मान को छ: महीने तक लटकाने की साजिश से शिक्षकों में आक्रोश

नियत तिथि पर ऑनलाइन स्वीकृत होने वाले चयन वेतन मान को छ: महीने तक लटकाने की साजिश से शिक्षकों में आक्रोश
गोरखपुर(30 सितंबर)। उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश संख्या 4307(1)/15- 8- 2001 दिनांक 20 दिसंबर 2001के क्रमांक 1में उल्लिखित नियमों के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों को 10 वर्ष पर चयन वेतनमान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वीकृत करने के आदेश को बिना किसी शासनादेश के कुछ उच्च अधिकारियों द्वारा बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है और उसे वर्ष में केवल दो बार स्वीकृत करने का कुचक्र किया जा रहा है जबकि उस आदेश में केवल प्रोन्नति वेतन मान को वर्ष में दो बार स्वीकृत करने का आदेश उल्लिखित है।
इस प्रकार शिक्षकों के सुविधाओं, सेवा शर्तों से छेड़छाड कर शिक्षकों को उद्वेलित करने का प्रयास कुछ उच्चाधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जो शिक्षा व्यवस्था को ठप कराने एवं लोकप्रिय सरकार की छवि धूमिल करने की साजिश जैसा कार्य है।
जबकि शिक्षक हित में माननीय मुख्य मंत्री जी के घोषणा के बाद भी 5 सितंबर से 25 दिन बीत जाने के बाद भी शासनादेश नहीं जारी कर सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुवे उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मांडलिक मंत्री ज्ञानेन्द्र ओझा ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बार बार कहा गया है कि ऑनलाइन व्यवस्था सरलीकरण एवं भ्रष्टाचार मुक्त होने के लिए बनाई जा रही है, परन्तु नियत तिथि पर जिले स्तर के अधिकारी द्वारा ऑनलाइन स्वीकृति होने वाले कार्य को छः महीने बाद स्वीकृत होने की व्यवस्था बनाया जाना संदेह के घेरे में एवं समझ से परे है। जिससे जिले और प्रदेश के शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त हो रहा है क्योंकि सितंबर महीने में चयन वेतन मान पाने योग्य शिक्षकों का स्वीकृति आदेश नहीं जारी किया गया।
शिक्षक नेता ओझा ने कहा कि यदि इसी प्रकार बिना शासनादेश के अधिकारियों द्वारा शिक्षकों के विभिन्न सेवाशर्तो से छेड़छाड़ किया जायेगा एवं चयन वेतनमान को 10 वर्ष की नियत तिथि पर जनपद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ऑनलाइन स्वीकृत किये जाने से रोक कर उसे 6 महीने बाद स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया तो निकट भविष्य में इसके लिए भीषण आंदोलन करने को शिक्षक एवं संगठन बाध्य होंगे। जिससे शिक्षा व्यवस्था ठप होगी और उसकी सारी जिम्मेदारी मनमाना रवैया अपनाने वाले उच्च अधिकारियों की होगी।



