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आज़मगढ़ के 9 छात्र यूक्रेन में फंसे थे,अब कोई पहुंचा दिल्ली तो कोई मुम्बई , किसी को अभी भी फ्लाइट का इंतज़ार।

यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए जिले के नौ छात्र वहां फंसे थे जिनमें कुछ दिल्ली और मुंबई पहुंच चुके हैं तो को कोई यूक्रेन से बाहर निलक कर फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। जो विद्यार्थी यूक्रेन से बाहर निकल गए हैं उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है

कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गदनपुर हिच्छनपट्टी गांव निवासी जिस छात्र का परिजनों का संपर्क टूट गया था, वह भी यूक्रेन से बाहर निकल गया है.
सगड़ी क्षेत्र के खतीबपुर की रेनू यादव दिल्ली पहुंच गई हैं। वे यूक्रेन में एमबीबीएस की छात्रा हैं। वे दिल्ली एयरपोर्ट पर दोपहर एक बजे पहुंची। शाम को सात बजे दिल्ली से वाराणसी के लिए हुई। परिजन उनको लेने के लिए बाबतपुर हवाई अड्डा पर इंतजार कर रहे हैं। मंगलवार की रात तक वे घर पहुंचेगी.
लालगंज के चेवार पश्चिम गांव निवासी बंगेश्वर प्रताप सिंह पुत्र मास्टर अरविंद कुमार सिंह एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए एक वर्ष पूर्व यूक्रेन गए हुए थे। वे यूक्रेन में फंसे थे जिलको लेकर परिजन चिंतित थे। बंगेश्वर प्रसाद सिंह ने परिजनों को बताया कि वह यूक्रेन से रोमानिया पहुंच चुके हैं। उसको लेकर पिता अरविंद चिंतित हैं.
सरायमीर थाना क्षेत्र के पवई लाडपुर निवासी श्रेया यादव भी मुंबई पहुंच चुकी है। जहां वह अपने रिश्तेदार के साथ रुकी हुई हैं। पिता ने बताया कि मेरी बेटी यूक्रेन से सकुशल लौट आई है। हमारे लिए इससे ज्यादा खुुशी की कोई बात नहीं है.
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गदनपुर हिच्छनपट्टी गांव निवासी विपिन पुत्र सुरेंद्र यादव यूक्रेन से निकल कर स्लोवाकिया पहुंच गए हैं। उनका परिजनों से संपर्क टूट गया था जिससे परिजन परेशान थे। उन्होंने मंगलवार को परिजनों को फोन पर अपनी खैरियत की जानकारी दी.
सुबह तक हंगरी सीमा पर पहुंचेंगी अनुष्का
आजमगढ़। नगर के सिधारी मुहल्ला निवासी अजय प्रताप सिंह की बेटी अनुष्का सिंह भी हंगरी बार्डर तक बुधवार की सुबह तक पहुंच जाएगी। पिता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद उसे ट्रेन मिली जिससे वह हंगरी बार्डर से 300 किमी पहले तक पहुंच गई। वहां से वह लोग हंगरी बार्डर को रवाना होंगे। बेटी ने बताया कि वह लोग बुधवार की सुबह तक हंगरी बार्डर पहुंच जाएंगे.

हंगरी पहुंचे विनीत, परिवार में हर्ष
आजमगढ़। नगर के हीरापट्टी निवासी अनिल विश्वकर्मा का पुत्र विनीत विश्वकर्मा भी यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वह युद्ध शुरू होने पर वहां फंस गया था। मंगलवार को उसके हंगरी पहुंचने की सूचना मिलते ही परिवार में हर्ष व्याप्त हो गया। विनीत के बाबा जेआर विश्वकर्मा ने बताया कि मेरा पोता हंगरी पहुंच गया है। सुनकर बहुत खुशी हो रही है। अब वह वहां पर फ्लाइट का इंतजार कर रहा है.

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