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भाषा यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में बोली राज्‍यपाल, विलुप्‍ति की कगार पर विश्‍व की 2500 भाषा

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती में बोली राज्‍यपाल विश्व में करीब 2500 भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में से 25 फीसद ऐसी भाषाएं हैं जिन्हें बोलने और समझने वालों की संख्या एक हजार से भी कम है।

लखनऊ। विश्व में करीब 2500 भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में से 25 फीसद ऐसी भाषाएं हैं जिन्हें बोलने और समझने वालों की संख्या एक हजार से भी कम है। सोमवार को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि में आयोजित पांचवे दीक्षा समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कही। उन्होंने विलुप्त हो रहीं भाषाओं को लेकर काफी चिंता जताई है।

दीक्षा समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि हमारे देश में करीब 1652 भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन स्थानीय भाषाओं की स्थिति यहां भी खराब है। यह बातें उन्होंने एक आंकड़े के आधार पर कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे में भाषा के क्षेत्र में, शोध कार्यो को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही विलुप्त हो रही भाषाओं के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो की खुदाई में कतिपय शिलालेख प्राप्त हुए हैं, जिन्हें अद्यतन स्थिति तक पढ़ा एवं समझा जाना सम्भव नहीं हो सका है। यह भाषाओं के क्षेत्र में शोध कार्यों की कमी को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय एक ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां, भाषाओं की शिक्षा प्रदान करने के साथ ही साथ विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा शास्त्र, पत्रकारिता एवं जनसंचार एवं प्राविधिक शिक्षा जैसे पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

नई शिक्षा नीति में इसी तरह के विश्वविद्यालय की अवधारणा बनाई गयी है। भाषा किसी भी व्यक्ति विशेष को अभिव्यक्ति प्रदान करती है। भारत एक ऐसा देश है जहां कहावत है कि, कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी। ज्ञान -विज्ञान का संचयन और विस्तार, भाषा के बिना सम्भव नहीं है। उन्होंने मंच पर बैठे मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक चक्रधर के साथ मिलकर विवि को भाषा के क्षेत्र में शोध करने के लिए कहा है। इसके लिए कुलपति द्वारा भाषा के उत्थान और शोध के लिए तैयार की गई समिति के साथ मिलकर पद्मश्री मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर हर्ष हुआ है कि भाषा विवि की अवधारणा को मूर्तरूप देने के लिए एवं विलुप्त हो रही भाषाओं के संरक्षण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को नामित किया गया है। यह समिति भाषा विश्वविद्यालय की अवधारणा को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने के साथ ही विलुप्त हो रही भाषाओं के संरक्षण हेतु भी परामर्श प्रदान करेगी। जिससे भाषाओं पर शोध हो उनका विकास है। इस दौरान डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा, विवि के पूर्व कुलपति प्रो. महरूफ मिर्जा व अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहें।

छात्रों को मिलेगी मेडिकल सुविधा

विवि की 40 फीसद छात्राएं एनेमिक हैं। इस पर उनका इलाज एवं काउंसिलिंग विवि प्रबंधन द्वारा केजीएमयू और एक निजी संस्थान द्वारा कराया जा रहा है। इस के लिए भी एक एमओयू कुलपति ने बीते दिनों हस्ताक्षर किया था। कुलपति विनय कुमार पाठक ने बताया कि उन छात्राओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। विवि में किसी भी प्रकार की मेडिकल जरूरत के लिए तत्काल एंबुलेंस अथवा दवाइयां और डॉ. उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

नई शोध पीठ का पुर्नगठन

प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि शोध एवं नवाचार किसी भी विश्वविद्यालय का मौलिक कार्य है। विश्वविद्यालय में स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ का पुनर्गठन कर अध्ययन केंद्र में स्थाई रूप से क्रियाशील किया गया है। गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने संशोधित पीएचडी ऑडिनेंस को नियमानुसार अंगीकृत किया है।

छात्र सीखेंगे जर्मन भाषा

विवि द्वारा कोलैबरेटिव लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए सेंटर फॉर मॉडर्न यूरोपियन एंड एशियन लैंग्वेजे के अंतर्गत जर्मन दूतावास के साथ एक एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है। इस एमओयू के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विद्याॢथयों को जर्मन भाषा सीखने का मौका मिलेगा। विद्याॢथयों के लिए जर्मन दूतावास द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं को आयोजित करने मे सहायता की जाएगी। जर्मनी में उपलब्ध उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी भी दूतावास द्वारा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को दी जाएगी।

मां बलैय्या लेकर लगता थी टीका हमाये लल्ला के न लगे नजर, अब कोरोना के लिए भी टीका लगवाएंपद्मश्री ने इस दौरान कहा कि जब हम छोटे तो मां हमारी बलैय्या लेती थीं कि हमाए बेटवा का नजर न लगे और काजल का टीका लगाती थीं। अब हमें कोरोना से बचने के लिए टीका लगवाना है। वैक्सीन भी एक टीका ही है उन्होंने कोविड-19 वैक्सीन पर खुल कर चर्चा की उन्होंने कहा कि सीनियर सिटीजन का वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। हर व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराना चाहिए न कि अधिक दिमाग लगाना चाहिए। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। यह वैक्सीन एक टीके की तरह है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक चक्रधर को विवि में भाषा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने को कहा है। इस पर पद्मश्री ने कहा कि वह भाषा के क्षेत्र में विवि में विभिन्न शोध कराएंगे। 30 घंटे की भाषा के क्षेत्र में कक्षाएं देंगे। छात्र-छात्राओं को शिक्षित करेंगे। वह कुलपति द्वारा बनाई गई समिति के साथ काम करेंगे।

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