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गुडग़ांव में सभी बिरादरियों के समर्थन से सुधीर सिंगला की लगेगी नैया पार 

गुडग़ांव में सभी बिरादरियों के समर्थन से सुधीर सिंगला की लगेगी नैया पार 

 राजनीति के भंवर में खुद नये पर पारिवारिक पृष्ठभूमि है राजनीतिक

 पूर्व मंत्री सीताराम सिंगला के पुत्र सुधीर सिंगला बीजेपी की टिकट पर चुनाव मैदान में

 जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हैं सुधीर सिंगलाछत्तीस बिरादरियों का मिलेगा समर्थन

 रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम बेशक उनका व्यक्तिगत रूप से पेशा वकालत का हो, लेकिन पिता के राजनीति में होने से उन्होंने बचपन से राजनीति का ककहरा पढ़ा है, सुना है। देश की सबसे बड़ी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ मंत्री बने श्री सीताराम सिंगला भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन बीजेपी ने उनके कद को कम नहीं होने दिया और कमतर नहीं आंका और उनके बेटे एडवोकेट सुधीर सिंगला को गुडग़ांव विधानसभा से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया।जिस तरह से स्वर्गीय सीमाराम सिंगला का नाम आज भी समाज में अदब से लिया जाता है, उसी का सम्मान करते हुये बीजेपी ने टिकट सुधीर सिंगला को थमा दी। पंजाबी, बनिया बाहुल गुडग़ांव विधानसभा क्षेत्र में समीकरण उनके हक में इसलिए भी कहे जा सकते हैं कि खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पंजाबी हैं और उन्होंने बनिया समाज के स्वच्छ छवि के व्यक्ति को टिकट देकर दोनों बिरादरियों को साधने का काम किया है। पूर्व मंत्री सीताराम सिंगला का व्यक्तित्व ऐसा था कि वे छत्तीस बिरादरियों को साथ लेकर चलते थे। समाजसेवा के मसीहा कहे जा सकते हैं। जीवन के अंतिम समय तक भी वे संस्थाओं में सक्रिय रहे और समाजसेवा के स्तंभ के रूप में खड़े रहे उनका समाज में उच्च सम्मान इसी बात से साबित हो जाता है कि उन्हें संस्थाओं ने अपना पितामह माना था। उनकी मौजूदगी और आशीर्वाद मात्र से संस्थाओं के समाजसेवा के कार्य निरंतर चलते रहे और आज भी उन्हीं के दिखाये रास्ते पर चलकर संस्थायें काम कर रही हैं। सिंगला परिवार में इन सभी खूबियों की बदौलत बीजेपी ने गुडग़ांव से टिकट वितरण में उन्हें अहमियत दी गई और उनके बेटे को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया। सुधीर सिंगला भले ही प्रोफेशनल रूप से एडवोकेट हैं, लेकिन समाजसेवा का जज्बा उनके भीतर भी खूब है। पिता स्वर्गीय श्री सीताराम सिंगला की समाजसेवा की विरासत को वे बखूबी संभाल रहे हैं। राजनीति के दंगल में भले ही उन्होंने आगे बढ़कर कोई दिखावा आदि नहीं किया, लेकिन पार्टी ने राजनीतिक फिजां का आंकलन करके उनके नाम पर मुहर लगाई।

पंजाबीव्यापारी  अन्य वर्गों का मिलेगा पूरा साथ

 रही बात उनकी जीत की तो इसमें कोई दोराय नहीं है कि उनकी रिकॉर्ड मतों से जीत होगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का पंजाबी होना पंजाबियों को साध सकता है और खुद सुधीर सिंगला का व्यापारी वर्ग से होना इस बात पर मुहर लगाता है कि समाज के लोग उनके खिलाफ नहीं जायेंगे। क्योंंकि इस बात की चर्चायें राजनीतिक गलियारों में टिकट आवंटन से पूर्व भी होती रही कि विधायक उमेश अग्रवाल की टिकट काटकर किसी नये नेता को देने की बजाय अगर सिंगला परिवार में दी जाती है तो पुराने कार्यकर्ताओं को कोई शिकायत नहीं होगी। हां, अगर किसी नये व्यक्ति को पार्टी यहां से टिकट देती है तो फिर कार्यकर्ता नाराज हो जायेंगे। इसलिए अब बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता, नेता भी इस बात से खुश हैं कि उनका पार्टी ने सम्मान किया है। उनकी भावनाओं का अनादर नहीं किया।