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रामलीला में चार बेटियों की असली शादियां कर समाज को दिखाई नई राह

रामलीला में चार बेटियों की असली शादियां कर समाज को दिखाई नई राह

-रामलीलाओं के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ हो

-राजा दशरथ की सीता सहित चार पुत्रियों का विवाह धूमधाम से किया

-रामलीला में दर्शक हुये भाव-विभोर

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम। बेशक वहां रोज कलाकारों के माध्यम से श्री राम जी की लीला खेली जाती हो। बेशक वहां कलाकार अपना रोल करके फिर से निजी जीवन में आ जाते हों, लेकिन बीती रात जो वहां हुआ, वह समाज को नई दिशा दे गया और यह संदेश भी दे गया कि समाजसेवा के लिए आपको जहां मौका मिले, अपना काम कर देना चाहिये। वो भी ऐसा काम जो कि समाज में नई सोच पैदा करे।
ऐसा ही काम कर दिया है मिलेनियम सिटी गुरुग्राम के जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ने। शहर में रामलीलाओं का दौर जारी है। यहां से डेढ़ दर्जन रामलीलाएं होती हैं। इन्हीं में से एक है श्री दुर्गा रामलीला। लीला मंचन के 54वें साल में इस लीला ने इस साल प्रवेश किया है। यहां एक बात है जो कि इसे शहर की और रामलीलाओं से अलग करती है। वह है लीला मंचन के साथ समाज के लिए सकारात्मक सोच। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुये रामलीला कमेटी ने इस बार निर्णय लिया कि मंच पर खेली जाने वाली लीला में राजा जनक की चार पुत्रियों का राजा दशरथ के चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जो विवाह किया जाता है, वह इस बार इन पात्रों की बजाय असली और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का किया जाये। इसी कड़ी में यहां रामलीला में चार बेटियों में से दो गुरुग्राम की और दो दिल्ली की बेटियों के परिजनों ने संपर्क करके अपनी इच्छा जताई तो उन्हें तमाम जानकारियां उपलब्ध करने के बाद कमेटी की ओर से चयन कर लिया गया।

धूमधाम से निकाली गई चारों दुल्हों की बारात

राम और उनके तीनों भाइयों के विवाह पर दिन में बारात निकाली गई। शहर के बाजारों में से निकाली गई बारात में तो कलाकारों को ही राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में घोड़ों पर बिठाया गया था। इसके बाद बारात यहां सुभाष नगर स्थित प्रजापति धर्मशाला में पहुंची। वहां खाने का कार्यक्रम था। खाना आदि खाकर बारात फिर से रामलीला स्थल से असली दूल्हों को घोडिय़ों पर बिठाया गया। उनके आगे खुली जिप्सी में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के पात्र सवार थे। बैंड बाजों के साथ उन्हें रामलीला स्थल तक ले जाया गया। बारात में शामिल रामलीला के कलाकार, सदस्य और वर पक्ष की तरफ से पहुंचे लोग जमकर नाचे। रामलीला परिसर में पहुंचकर चारों दूल्हों का परंपरा अनुसार स्वागत किया गया। इसके बाद चारों जोड़ों (कुमारी सोनिया संग अमन कुमार, कुमारी बबीता संग योगेश, कुमारी मोनू संग राजकुमार, कुमारी कंचन संग अजय) को मंच पर ले जाकर रिंग सेरेमनी और जयमाला कार्यक्रम कराया गया। इस दौरान राम-नाम की ध्वनि, शंखनाद और पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। यह सारा दृश्य देकर रामलीला देखने पहुंचे लोग तो भावुक हुये ही, साथ में वर-वधू पक्ष के सदस्य भी भाव-विभोर हो गये। सभी अपने बच्चों में राम-सीता की छवि देख रहे थे। उनके लिए ये पल अनमोल और यादगार बन गये। कन्याओं को शादी में दिया जाने वाला दहेज का सारा सामान भी दिया गया। महिलाओं ने यहां पर खूब साडिय़ां दान में दी। इस तरह से एक-एक वधू के हिस्से 121-121 साडिय़ां आई। इसके अलावा गृहस्थ जीवन का सारा सामान दहेज के रूप में बेटियों को दिया गया और उनके सुखी वैवाहिक जीवन की सभी ने कामना की।

दूसरी रामलीलाएं भी ऐसी प्रथा करें शुरू

इस मौके पर श्रीदुर्गा रामलीला कमेटी के प्रधान बनवारी लाल सैनी ने कहा कि यह बहुत ही धर्म का काम है। शहर में 18 रामलीलायें होती हैं। सभी को इस कार्य से प्रेरणा लेनी चाहिए। आपस में सहयोग भी करना चाहिये। अगर एक रामलीला में चार शादियां कराई जायेंगी तो 18 रामलीलायें 72 शादियां कराकर इतिहास रच सकती हैं। चार नहीं तो सिर्फ राम के रूप में एक ही शादी कराकर शुरुआत कर सकते हैं। समाजहित में यह बहुत बड़ा काम है। रामलीला को सिर्फ मनोरंजन और शिक्षा देने के साथ सामाजिक सराकारों से जोड़कर भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि एक शादी पर डेढ़ लाख से भी अधिक का खर्च आया है। चारों शादियों पर छह लाख से ज्यादा खर्च किया गया है।

साधुओं ने भी दिया आशीर्वाद

इस नई प्रथा की शुरुआत करने के मौके पर पहुंचे स्वामी विवेकानंद ने कहा कि समाजसेवा का यह बड़ा माध्यम है। धर्मार्थ के साथ अगर हम परमार्थ भी करते हैं तो वह सीधे हमारे पुण्य में जुड़ जाता है। जागरण में हम लाखों खर्च करते हैं, अगर ऐसी शादियां करा दें तो बहुत भला होगा। गुरु मां साध्वी आत्मचेतना ने कहा कि हमें बेटियों को अच्छे संस्कार देने चाहिये। उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान करायें। मर्यादा में रहना सिखायें, क्योंकि मर्यादा बेटियों का, महिलाओं का गहना होती है।

राम बारात में दिये गये सामाजिक संदेश

शहर में कमेटी की ओर से राम बारात निकाली गई। राम बारात सिर्फ रामलीला को केंद्र में ध्यान में रखकर नहीं बल्कि सामाजिक संदेश देने के लिहाज से भी निकाली गई। राम बारात में पेड़ लगाने, पर्यावरण बचाने, पानी बचाने, बेटी बचाने, स्वच्छ भारत, प्लास्टिक का उपयोग न करने समेत कई सामाजिक मुद्दों को लेकर जागरुक किया गया। इन विषयों पर संदेश लिखे बैनर वाहनों पर लगाये गये थे।