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सबीले तब तलक जिंदा रहेंगी अली असगर से शर्मिंदा रहेंगी

सबीले तब तलक जिंदा रहेंगी अली असगर से शर्मिंदा रहेंगी

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरूग्राम ।   सबीले तब तलक जिंदा रहेंगी अली असगर से शर्मिंदा रहेंगी, यह बात एक शायर के द्वारा कही गई है। 15 सौ से अधिक वर्ष  बीत जाने पर भी तमाम बंदिशों के बावजूद न तो सदाए हुसैन रूकी और न ही हजरत इमाम हुसैन का गम मनाने का सिलसिला कम हो सका है। जब भी मोहर्रम आता है, कत्ल-ए-हुसैन दरअसल मर्ग-ए- यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर करबला के बाद। करबला में पानी नहीं था, लेकिन मातमदारों के लिए पानी की कोई कमी नहीं थी।

नवाब मंसूरअली खान पटौदी के पैतृक शहर पटौदी, मेवात, तावडू,  में हजरत हुसैन पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे और शेर-ए-खुदा हजरत अली असगर की शहादत की याद में हिन्दु-मस्लिम एकता का परिचय कराते हुए ताजिया निकाला गया। इस मौके पर हजरत इमाम हुसैन परिवार के 72 शहीद सदस्यों को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मातमपुर्सी करते हुए अपने आप को लोहे की जंजीरों से यातनाएं देते हुए दुख का इजहार भी किया।

मंगलवार को ताजिया के जुलूस की शुरूआत पटौदी थाना के नजदीक स्थित इमामबाड़ा से हुई। ताजिया के जुलूस में हिन्दु-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिरकत की और ताजिया को ससम्मान कर्बला तक लेकर गए। ताजिया का जुलूस पटौदी थाना रोड़, नोहटा चौक, बड़ा बाजार, व्यापारी मौहल्ला और पटौदी-रेवाड़ी रोड़ से होते हुए ईदगाह के साथ बने करबला पहुंचा। यहां गम में डूबे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ताजिया को सुपुर्द-ए-खाक किया। हजरत बाबा सैयद नुरूदीन दरगाह के संचालक एवं हजरत बाबा सैयद नुरूदीन धर्मार्थ ट्रस्ट के चेयरमैन सैयद एजाज हुसैन जैदी जज्जू बाबा की अगुवाई में निकाले गए ताजिया में  कैप्टन नरेन्द्र यादव, इलियास हुसैन, शानिया, शबीना, अनिता, अलीशा, महराज, समद हुसैन,निसार खान, अलमदार सादिक हुसैन, आबिद अली, रजा हुसैन, अजय कुमार, सीताराम, सैयद इलियास हुसैन, मकसूद अली, मकसूद अहमद, छुट्टन, मनसूर, महबूबअली, असलम, इलियास, पप्पू, साटू, अलताफ हुसैन, वसीम, मोहसीन खान, राहिद खान, वाहिद खान, गफूर खान, एसखान,  सहित सैकड़ों लोग ने शामिल हुए।

जालिम यजीद को नहीं माना खुदा

हजरत बाबा सैयद नुरूदीन दरगाह के संचालक जज्जू बाबा ने बताया कि फरात नदी के किनारे उस वक्त के जालिम राजा यजीद ने अपने आप को खुदा मानने के लिए हजरत पैगंबर के परिवार पर दवाब डाला और यातनाएं भी दी गई थी। यहां तक कि छह माह के मासूम बच्चे अली असगर को फरात नदी का एक बूंद पानी तक भी नही पीने दिया और उसकी जान ले ली। उन्होंने कहा इंसानियत एहतराम का दर्जा इसीलिए दिया गया कि हजरत पैगंबर मौहम्मद के परिवार ने एक जुल्मी राजा का विरोध करते हुए मासूम बच्चों सहित अपना बलिदान अल्लाह की नेक राह पर चलते हुए  दे दिया था।

आलमदार को बांधी मन्नत की डोर

इससे पहले इमामबाड़ा में सोमवार रात के समय विभिन्न धर्म, वर्ग और संप्रदाय के लोगों ने ताजिया स्थल पर मन्नत मांगते हुए अलमदार पर डोर बांधी। अलमदार के दरबार में सबसे अधिक  भीड़ महिलाआें और बच्चों कर ही देखी गई। इस दौरान बहुत सी महिलाआें और माताआें ने अपने बच्चो को बुरी नजर से बचाने के लिए उन्हें ताजिया के नीचे से भी निकाला और अपने बच्चों की लंबी आयु की दुआ मांगी। दिल्ली, झज्जर, गुडग़ांव, शाहबाद मोहम्मदपुर और पालम से आए हरमेश, राम किशन सहित अन्य ने बताया कि बीते वर्ष मन्नम की डोर बांधी थी, अब पगड़ी आेर चुन्नी बांधने के लिए आए हैं।