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विधायक का पीएम की रैली में न जाना है चर्चाओं में, कट सकती है टिकट

विधायक का पीएम की रैली में न जाना है चर्चाओं में, कट सकती है टिकट
-टिकट कटने की अटकलों के बीच विधायक असमंजस में

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24
गुरुग्राम। विधायक उमेश अग्रवाल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रोहतक में रविवार को हुई रैली में न जाना राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बन गया है। तरह-तरह की बातें हो रही हैं। इस सब बातों के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आ रही है कि इस बार नये चेहरे को गुडग़ांव विधानसभा से चुनाव मैदान में बीजेपी उतार सकती है। शायद इसी के चलते विधायक उमेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री तक की रैली में जाने से परहेज किया। उनकी ओर से रैली में भेजे गये वाहन भी कम थे और वाहनों में बैठे लोगों की संख्या भी बहुत कम थी। अब चर्चा यह चल पड़ी है कि अगर उन्हें बीजेपी से टिकट नहीं मिलती है तो वे किसी दूसरी पार्टी में जाकर खुद या पत्नी को चुनाव लड़ाएंगे।
पार्टी का कोई भी कार्यक्रम हो, उसमें गुडग़ांव के विधायक उमेश अग्रवाल की ओर से जोर-शोर से काम किया जाता है। लेकिन इस बार रोहतक में हुई प्रधानमंत्री की रैली में उनको जोश ठंडा नजर आया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता होने के नाते विधायक उमेश अग्रवाल पार्टी के कार्यक्रमों के लिए पूर्व में खूब पसीना बहाते थे, लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कहीं न कहीं उनका पार्टी से मोहभंग हो रहा है। पूर्व के विधानसभा चुनाव में तो कम ही दावेदार थे, लेकिन इस बार टिकट मांगने वालों की लाइन लगी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की बात पर विश्वास करें तो इस बार पार्टी नये चेहरे पर अपना दांव लगायेगी। गुडग़ांव सीट हॉट सीट बन चुकी है। यह ठीक है कि वह टिकट को लेकर अपना दावा पूरा कर रहे हैं, लेकिन जब पार्टी ने नये नेता को टिकट देने का मन बना ही लिया है तो फिर उनके दावों का कोई महत्व नहीं रह जाता। टिकट आवंटन में पूरी तरह से सीएम मनोहर लाल की चलेगी। चाहे पीएम मोदी हो या फिर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, दोनों के चहेते मनोहर लाल हैं। दोनों ही नेता सीएम मनोहर लाल पर आंख बंद करके विश्वास करते हैं।
दो प्रमुख दावेदारों में से एक पर लगेगी मुहर!
गुडग़ांव विधानसभा से इस समय बीजेपी की टिकट के दावेदार तो कई नेता हैं, लेकिन प्रमुख रूप से दो ही दावेदारों की पलड़ा भारी नजर आ रहा है। इनमें जिला सचिव नवीन गोयल और स्वामी धर्मदेव। हालांकि स्वामी धर्मदेव ने अभी तक पार्टी की भी सदस्यता नहीं ली है, लेकिन टिकट के लिए उनका नाम चर्चाओं में है। उनके मुकाबले नवीन गोयल का भी कद बड़ा है। वे पार्टी के साथ संघ से जुड़कर वर्षाेें से कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनको नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है।
उमेश अग्रवाल सरकार में दिखा चुके हैं बगावती तेवर
विधायक उमेश अग्रवाल अपनी ही सरकार में बगावती तेवर दिखा चुके हैं। विधानसभा से लेकर बाहर तक उन्होंने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाये हैं। एक बार तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा उन्हें दौरे के दौरान आमंत्रित नहीं किया गया तो वे खुलकर सीएम के खिलाफ बोले। उनके करीबी के खिलाफ सोनीपत में केस दर्ज हुआ। सबसे बड़ी बात तो यह कि उन्होंने दक्षिण हरियाणा के कुछ विधायकों के साथ मिलकर सरकार गिराने की भी योजना बनाई थी, लेकिन वे सफल नहीं हो पाये। यह सब बातों उन्हें राजनीतिक रूप से पार्टी में कमजोर करती हैं।