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हमने 70 वर्षों की रीतियां सदन में तोड़ी हैं, पहले एक शेर था अब दो शेरों की जोड़ी है…

हमने 70 वर्षों की रीतियां सदन में तोड़ी हैं, पहले एक शेर था अब दो शेरों की जोड़ी है…
-जैकबपुरा स्थित जैन मंदिर में हुआ कवि सम्मेलन

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम। हमने 70 वर्षों की रीतियां सदन में तोड़ी हैं, पहले एक शेर था अब दो शेरों की जोड़ी है। धारा 370 हटाये जाने पर कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपनी इस रखना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के इस कदम को सराहा। साथ ही राजस्थान के तिजारा से प्रख्यात कवि डा. कमलेश की कविता-जीवन की अग्रि परीक्षा में अध्यात्म का जो आकर्षण है, तन की, मन की और वाणी की शुद्धि का नाम दस लक्षण है…। कवियों ने अपनी इन रचनाओं के माध्यम से देश, समाज, धर्म के नाम से संदेश दिया। हास्य कवियों ने खूब हंसाया भी।
यहां जैकबपुरा स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिन में दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन कवि सम्मेलन आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन की शुरूआत मंदिर के प्रधान नरेश जैन, उप-प्रधान रविंद्र जैन, महामंत्री अशोक कुमार जैन, सह-मंत्री जैनेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शैलेंद्र जैन, संजय जैन, मनोज जैन, विजय जैन, मनीष जैन, अधिवक्ता अभय जैन आदि द्वारा भगवान महावीर के चित्र अनावरण के साथ हुई। चित्र अनावरण के साथ णमोकार महामंत्र भी बजता रहा। सबसे पहले सास-बहु अर्चना जैन-त्रिशु जैन की जोड़ी ने-हम हैं तेरे भोले साही-तू है सबका एक चमन, सागर दया का तू गुरुवर-तुझको अर्पण तन और मन गीत पेश किया। इसके बाद मंच पर बारी आयी कवियों की। इसके बाद कवि डा. कमलेश ने अपनी रचना में सुनाया-जीवन की अग्रि परीक्षा में अध्यात्म का जो आकर्षण है, तन की, मन की और वाणी की शुद्धि का नाम दस लक्षण है…। पहली सीढ़ी क्षमा धर्म की आभूषण है वीरों का, क्षमा शील तो जैन धर्म में कोहिनूर है वीरों का। इसके बाद कवि चेतन चर्चित ने अपनी रचनायें पढ़ी। उन्होंने यहां अपनी रचनाओं में सबको खूब हंसाया। समाज के लोगों से खचाखच भरे हॉल में हंसी के ठहाके लगते रहे और तालियां की गडगड़ाहट गूंजती रही।
इंदौर से आये कवि चेतन चर्चित ने अपनी रचनाओं में इंसान के व्यक्तित्व, महिलाओं, बेटियों के प्रति सकात्मक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा-जीवन के नौ-रसों का श्रृंगार होती हैं बेटियां, हमेशा जगमगाती रहे वो दीपों का त्योहार होती हैं बेटियां, कल्पना भी ना कर सकें जीवन की कोई, मां-बहन-बेटी-पत्नी का आकार होती हैं बेटियां। इस पर खूब तालियां बजी। उन्होंने मुहावरे को नयापन देकर सुनाया-जो जीता वही सिकंदर नहीं, अब जो जीता वही नरेंद्र।
इसके बाद कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपनी रचनायें पेश की। उन्होंने चरखे से आजादी की बात पर कटाक्ष में कहा-स्वाभिमान के वास्ते गोलियां भी खानी पड़ती हैं, चरखा चलाने, सूत कातने से नहीं आजादी के वास्ते गर्देनें भी कटानी पड़ती हैं। धारा 370 पर अपनी रचना में उन्होंने सुनाया-हमने 70 वर्षों की रीतियां सदन में तोड़ी हैं, पहले एक शेर था अब दो शेरों की जोड़ी है। हम कलाम के भारत में सद्दाम नहीं पलने देंगे कविता को भी खूब सराहना मिली।
टुंडला से आये कवि लटोरी लट्टू ने सबको खूब हंसाया। उन्होंने अपनी बात को संस्कारों से शुरू किया। उन्होंने सुनाया-हम अपनी भाषा से जितने दूर हो गया, उतने ही संस्कारों से भी दूर हो गये। भगवान महावीर को समर्पित अपनी कविता में उन्होंने कहा कि-हिंसा को मिटाने के लिए घर-घर में महावीर चाहिये। साथ ही उन्होंने संस्कारों बात में कहा कि बेटियों को बचाने के लिए जो बात कही जा रही है। अगर हम अपने बेटों को संस्कार अच्छे देंगे तो बेटियां अपने आप ही बच जायेंगी। चंद्रयान की विफलता पर उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों को मनोबल बनाये रखने के लिए कविता पेश की।