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शिवालयों में गूंजा ‘भोले नाथ’ और ईदगााह में ‘अता हुई नमाज’

शिवालयों में गूंजा ‘भोले नाथ’ और ईदगााह में ‘अता हुई नमाज’
भोले के भक्तों ने किया अभिषेक तो मुस्लिमों ने इब्राहिम की याद में दी कुर्बानी
सावन का अंतिम सोमवार और अपनी-अपनी परंपरा से मनाया गया त्योहार

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम ।   सावन माह का अंतिम सोमवार और इसी दिन ईद-उल-अजहा का पैगम्बर इब्राहिम अलसुलहा द्वारा अपने पुत्र इब्राहिम की अल्लाह के लिए दी गई कुर्बानी की परंपरा का त्योहार। धार्मिक परंपरा और आस्था के सामने तमाम तर्क और बहस  बेमानी रहते हैं। सभी को अपने धर्म और आस्था के मुताबिक त्योहार मनाते हुए खुशियां सांझाकर बधाई भी देते हैं। यहीं बात और भाईचारा देश को एकता के सूत्र में बांधे हुए है।
सावन के अंतिम सोमवार को शहर से लेकर आसपास के कस्बों, ग्रामींण अंचल के पौराणिक महत्व के शिवालयों में सुबह से ही शिवभक्तों के बीच में भगवान शंकर बाबा भोलेनाथ का रूद्रााभिषेक, अभिषेक करने के लिए जबरदस्त उत्साह बना रहा। बाबा भोले का आशिर्वाद लेने सहित भोले के दरबार में मन्नत मांगने के लिए अनेकानेक श्रद्धालू पहुंचकर अपनी श्रद्धानुसार  अभिषेंक कर पुण्य अर्जित कर  स्वयं का जीवन धन्य मानते रहे।
दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोग पैगम्बर इब्राहिम अलसुलहा द्वारा अपने पुत्र इब्राहिम की अल्लाह के लिए दी गई कुर्बानी की याद में , कुर्बानी देने की तैयारी में लगे देखे गए। इससे पहले गुरुग्राम शहर की विभिन्न मस्जिदो-ईदगाह व आसपास के पटौदी, सोहना, तावड़ू, बोहडाकला, फर्रूखनगर व अन्य स्थानों पर बनी मस्जिदों अज्ञैर ईदगाह में नमाज अता करने के लिए पहुंचना शुरू हो गए। जहां जगह की कमी महसूस की गई वहां सडक़ अथवा सडक़ किनारे बैठकर नमाज अता की गई। इसके लिए शासन-प्रशासन के द्वारा व्यापक सुरक्षा प्रबंध किये गए।
‘जुदा’, से पहले कुर्बानी के लिए अता की गई दुआ 
ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी की रस्म ‘जुदा’ कुर्बानी से पहले दुआ पढक़र की गई। दरअसल कुर्बानी की ही रस्म को ‘जुदा’ कहा गया है। ईद-उल-अजहा, बकरीद के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अल्लाह के नाम बकरों सहित अन्य जानवरों की कुर्बानी दी। कुर्बानी देने से पहले कुर्बान किए जाने वाले जानवर के लिए दुआ पढ़ी गई और इसके बाद विधिवत रूप से कुर्बानी दी गई। मंहगाई का असर कुर्बानी के लिए खरीदे गए जानवरों की कम संख्या को देखते हुए साफ नजर आया है।  कुर्बान किए जाने वाले जानवर बीते वर्ष के मुकाबले कम संख्या में खरीदे गए। फिर भी साधन-संपन्न मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तोता नस्ल के बकरे के अलावा महंगे खरीदे अन्य जानवरों की कुर्बानी अल्लाह के नाम पर दी और इसका गोश्त अपने परिचितो में तकसीम किया। मुस्लिम बहुल इलाकों में हिन्दु-मुस्लिम भाई-चारे को ध्यान में रखते हुए हिन्दु समुदाय से बधाई देने के लिए आने वाले मित्रों-परिचितों को विशेषरूप से मीठी सेवईयां-खीर या मिष्ठान खिलाकर मुंह मिठा कराया गया।
बुराई त्यागने सहित देश में अमन को की दुआ
ईद-उल-अजहा का पर्व हिन्दु-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उत्साह के साथ मनाया। पैगम्बर इब्राहिम अलसुलहा द्वारा अपने पुत्र इब्राहिम की अल्लाह के लिए दी गई कुर्बानी की परंपरा का निर्वाह करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बुराई को त्यागने सहित समाज और देश में अमन चैन की दुआ के साथ नमाज अता की। गई।
नवाब मंसूरअली खान के पैतृक शहर पटौदी में ईद-उल-अजहा की मुख्य नमाज पटौदी-रेवाड़ी सडक मार्ग पर स्थित ईदगाह में अता की गई। इस मौके पर हजारों मुस्लिम लोगों को नमाज अता कराई। नमाज के साथ खुतबा पढा और इसके बाद दुआ की गई। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी व्यवस्था नियंत्रण के लिए मौके पर मौजूद था। नमाजियो की भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुबह से चाक-चौबंद बनी रही। पुलिस बल सभी मस्जिदों के आसपास स्थिती नजर रखे हुए था।
नमाज अता करने के बाद नमाजियों ने जरूरतमंद लोगों को बक्शीस भी अता की। ईद-उल-अजहा की नमाज अता करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विभिन्न कब्रिस्तान में जाकर अपने-अपने पूवर्जों की मजार पर विशेष रूप से दुआ पढ़ी। शाही मस्जिद इफितखार मुसाजिद में, राजपूताना जामा मस्जिद में ,  कुरैशियान मस्जिद में ईद की नमाज अता कराई। नमाज अता करने और दुआ पढ़ऩे के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने-अपने पूर्वजों की कब्र पर फातिया पढ़़ा और दुआ की।
ईदी पाकर झूम उठे बाल-मन
ईद के त्योहार पर बच्चे ईदी लेकर फूले नहीं समाए। छोटे बच्चे सुबह से ही नए-नए वस्त्र पहनकर अपने-अपने परिजनों के साथ विभिन्न मजिस्दों और ईदगाह में पहुंच गए। मस्जिद-ईदगाह के आस-पास लगे झूलों पर बच्चों ने जी भरकर मस्ती की और झूला भी झूला। परिवार के बुजुर्गो ने इस मौके पर बच्चों को बाजार से खरीददारी करने के लिए ईदी के रूप में रुपए दिए, इतना ही नहीं परिजनों नेे बच्चों को उनकी पंसद के खेलने के लिए खिलौने भी दिलाए। नमाज अता करने के बाद किशोरवय हिंदु- मंस्लिम मित्रों और सहेलियों ने जी भरकर चाट-पकोड़ी का भी आनंद लिया। ईद की नमाज के बाद मुस्लिम युवतियों ने सजातीय और हिंदु परिवारों के सदस्यों को ईदी के रूप में मीठी सेवइयां-मीठाईयां विशेष रूप से भेंट स्वरूप दी साथ ही गले मिलकर खुशी को सांझा भी किया