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फतेहपुर – सबका साथ सबका विकास के दायरे से बाहर हुयी जनपद की पूर्व सम्रद्ध रियासत

सबका साथ सबका विकास के दायरे से बाहर हुयी जनपद की पूर्व सम्रद्ध रियासत.……..

जनपद मे कभी सत्ता का केन्द्र रहे या सत्ता निर्धारण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले असोथर साम्राज्य का वर्तमान हाल देखकर तो ये लगता है कि क्षेत्र के लिए आधुनिक इक्कीसवी सदी से कही बेहतर थी सत्तरहवी शताब्दी…
आजादी के बाद से भले ही शासन द्वारा इसे विकासखण्ड मुख्यालय का दर्जा देने के साथ ही . पुलिस थाना.. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र… उप मन्डी स्थल…. पशु चिकित्सालय … विद्युत उपकेन्द्र.. जैसी सुविधाएं प्रदान की गयी हो परन्तु समय की गति के साथ यहां होने वाला विकास उन्नति की जगह अवनति की ओर अग्रसर होता गया… रियासत होने की वजह से व्यवस्थित रूप से बसाए गए इस कस्बे मे जल निकासी.. वर्षा जल संरक्षण हेतु तालाब.. विभन्न समुदायो की बस्तियो का मिश्रित ना होकर अलग अलग व्यवस्थित होना….यातायात की सुगमता व आपातकालीन सुविधा हेतु गाजीपुर तक सुरंग से जोड़ना तत्कालीन दूरदर्शी योजना के तहत किया गया..
साम्राज्य को बाहरी खतरो से बचाने के लिए कस्बे की राजधानी कस्बे से चौदह किलो मीटर दूर गाजीपुर मे बनाना तत्कालीन आधुनिक सोच का परिचायक है
क्रषि के साथ व्यवसाय को ऐसा बढ़ावा दिया गया कि असोथर बाजार जनपद के महत्वपूर्ण बाजारो मे गिना जाने लगा जहां गैर जनपद के व्यवसायियो का तांता लगा रहता था…
भले ही यह क्षेत्र दस्युप्रभावित रहा हो परन्तु इस कस्बे का व्यवसायिक व सम्पन्न होने के साथ सुरक्षा व्यवस्था का यह आलम था कि कस्बे मे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना करने की जुर्रत किसी भी अराजक तत्व द्वारा नही हुयी…
क्षेत्र के साथ जनपद का शैक्षिक उन्नयन हो सके इस लिए असोथर रियासत द्वारा जनपद मुख्यालय फतेहपुर मे ए. एस इण्टर कालेज जैसे शिक्षा मंदिर को आम जनमानस के लिए सुलभ करना आज भी उसके द्वार पर अंकित कुंवर चन्द्रभूषण सिंह का नाम देखकर गौरवान्वित करता है…
अगर राजनैतिक द्रष्टिकोण से गौर करे तो तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा जी से लेकर सुषमा स्वराज का असोथर आकर इस राज्य का राजनीतिकरण करने… विश्वनाथ प्रताप सिंह की कर्मस्थली के रूप मे असोथर को प्राथमिकता देना इसके राजनैतिक महत्व को दर्शाता है.. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके प्रधानमंत्रित्व काल मे पहले प्रोजेक्ट के रूप मे जरौली पम्प कैनाल क्षेत्र के विकास के लिए प्रदान की गयी
असोथर राजघराने मे जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद भी रहे…
प्राचीन काल मे भी इस साम्राज्य का डंका दूर तक बजता था जब मुगलो को दांतो चने चबवाने के बाद.. दतिया ओरछा.. अवध.. व दिल्ली सल्तनत से आए तीस हजार सैनिको के साथ हुए युद्ध मे मुगलो को मिली पराजय ने इसे चौबिस परगनाओ का एकछत्र एकाधिपति घोषित कर दिया…
वही असोथर राज्य को ब्रिटिश उपनिवेश बनाने की मंशा लेकर आए स्टीमर से यमुना नदी द्वारा अपनी सेना लेकर आए ब्रिटिश कलेक्टर अर्ल मुट्ठी ( जिसके नाम से प्रयागराज के एक मुहल्ले का नाम मुट्ठागंज रखा गया) को असोथर नरेश न्रपराय द्वारा जरौली के यमुना घाट मे काटकर फेक देना इसकी कुशल शासन प्रणाली को दिखाता है
क्षेत्र की प्रगतिशीलता ही थी कि जिसकी चर्चा व आकर्षण ने पंजाब के सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाले नागा निरंकारी पथिक को असोथर मे खीचकर लाने व इसे अपनी तपस्थली बनाने पर मजबूर कर दिया….
असोथर यानी एक ऐसा राज्य जहां का राजा शासक होने के साथ खेतो मे हल चलाकर क्रषि कार्य भी करते थे उस क्षेत्र की धरती आज भी सोना उगलने का कार्य करती है
इस तरह अगर अतीत पर नजर डाले तो इस साम्राज्य का इतिहास गौरव.. वैभव.. राजनीति.. कूटनीति.. विकास.. शैक्षिक उन्नयन जैसे आयामो की कुशलता से भरा पड़ा है….
परन्तु अगर वर्तमान स्थिति की बात करे तो क्षेत्र का विकास बढ़ने के अलावा घटता जा रहा है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उच्चीकरण कर बनाया जाने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का विकास खण्ड मुख्यालय से बाहर जाना..जिले मे हाट शाखा के रूप मे जानी जाने वाले क्रषि उपज क्रय केन्द्र का कस्बे से बाहर जाने.. सीड स्टोर की सुविधा कस्बे से छीने जाने.. तथा इण्टर कालेज के अलावा किसी अन्य संस्थान की सुविधा ना मिलना लोगो की अकर्मण्यता… संसाधनो सो सहेज ना पाने.. विरोध का साहस ना दिखा पाने… व ग्रामविकास के प्रति उनके गैर जिम्मेदार रवैये को दिखाता है…
लगभग पच्चीस हजार जनसंख्या वालेे इस कस्बे के साथ आज भी ग्राम पंचायत लिखा जाना वाकई मे मुंह चिढ़ाने के जैसा है… क्षेत्र की राजनैतिक चेतना का आभाव ही है कि क्षेत्र पंचायत राजनीति मे मुख्यालय का कभी भी प्रतिनिधित्व नही रहा.. पंचायत की जातिगत हुयी राजनीति ने जहां लोगो को गुटबाजी मे बांट कर रखा है वही वर्चस्व की लड़ाई क्षेत्रीय विकास के मुद्दों से बड़ा मुद्दा बन चुका है…
आज कस्बे की सड़क जहां अपना अस्तित्व खो चुकी है वही ध्वस्त हुयी पेयजल पाइपलाइन ने कस्बे मे जल संकट की त्राहि मचा रखी है… एक समय शिक्षा के लिए दूर दूर से कस्बे आने वाले बच्चो के साथ अब कस्बे से ही छात्रो को शिक्षा के लिए भटकना पड़ रहा है…. यमुना तटवर्ती ग्राम सैंबसी मे शासन द्वारा प्रदान की गयी स्वास्थ्य सुविधा मे जहां ताला बंद रहता है वही कस्बे के लिए प्रदान की गयी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुविधा महज भवन निर्माण तक ही सीमित हो गयी है…
कस्बे का इकलौता माध्यमिक विद्यालय जहां शिक्षको की कमी के संघर्ष से जूझ रहा है वही बड़े आय के श्रोत होने के बावजूद विद्यालय को उच्च सुविधादायक बनाना प्रबंध समिति के प्रबंधन पर सवालिया निशान लगता है ….
क्षेत्र मे रोजगार के साधनो के आभाव के साथ किसी भी तरह के सरकारी व्यवसायिक.. शैक्षिक… संस्थानो का ना होना आज भी गांव का वातावरण बरकरार रखने पर आमादा है……
कस्बे की जल निकासी व्यवस्था इतनी सुद्रढ़ थी कि गंदा नाले के द्वारा कस्बे का पानी यमुना नदी तक पहुचाया जा सकता था परन्तु इस मौसम की पहली बारिश ने पूरे कस्बे को पूर्णतया जलमग्न कर दिया… अतिक्रमण हटाओ अभियान ने कस्बे को खंडहर का लुक देने के साथ ही नालियो के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया है…
कहने को तो कस्बे से सत्ता दल के बड़े पदाधिकारी है तथा क्षेत्र के साथ ही सदर की राजनीति का केन्द्र होना कस्बे पर विकास का रंग नही चढ़ा रही
वर्तमान सांसद का प्रथम चुनाव के समय जनता से किया गया किया गया वायदा आज भी वायदे के रूप मे ही कायम है जिसे उन्हे याद दिलाना भी किसी क्षेत्रवासी को गवारा नही महसूस होता….कस्बे की वर्तमान स्थिति तो यह है कि तारो तरफ जलभराव से आने वाली सड़ान्ध… सड़को का मिट चुका अस्तित्व… ध्वस्त पेयजल व्यवस्था… लड़खड़ाती विद्युत सुविधा…..शैक्षिक संस्थानो की अनुपलब्धता… क्रषि उपज को लेकर दर दर भटकता किसान.. रोजगार के लिए पलायन करता युवा…. व्यवसाय के चौपट होने से भाग्य को कोसते व्यापारी… सिल्ट सफाई ना होने से दिनबदिन सिकुड़ती जा रही नहरे.. इस पूर्ववर्ती सम्रद्ध राज्य के भविष्य पर ना सिर्फ तुषारापात कर रही बल्कि विकास की दौड़ मे इस क्षेत्र को अपंग बनाने का कार्य कर रही…
सरकार के अच्छे दिन आने के वायदे हो या रामराज्य या सुशासन आने की बाते ये सभी सबका साथ सबका विकास के ध्येयवाक्य के दायरे से बाहर होता ही दिख रहा है जिस पर क्या सपा क्या बसपा और फिर क्या भाजपा सभी सरकारो की नीतियां इस क्षेत्र मे बेरंग नजर आती है. .
अगर शासन का यही सौतेलापन जारी रहा तो वह दिन दूर नही जब कभी जनपद मे गौरवशाली व सम्रद्ध अतीत से भरी अर्गल राज्य के इतिहास मे सिमटने के साथ ही यह राज्य भी सिर्फ किताबो मे कैद रह जाएगा