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संसार के प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार – आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज 

संसार के प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार – आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now 24

संसार के प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार हैं और संसार का प्रत्येक प्राणी जीना चाहता है लेकिन आज का जो वातावरण है वह कहीं से भी मूक-प्राणियों के हित में नजर नहीं आता है।

उक्त विचार आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने जैकबपुरा स्थित जैन बारादरी में प्रैसवार्ता में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए

महाराज जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति केवल अपना सुख चाहता है और दूसरों के सुख से दुखी है। ये हमारी संस्कृति नहीं है। व्यकितगत स्वार्थ और सुख को ही मात्र देखना भारतीय संस्कृति नहीं है।

आचार्य श्री ने चैताया कि गिरता हुआ भारतीय संस्कृति का पतन और वातावरण मनुष्य जीवन के लिए भयंकर रुप से हानिकारक और दुःखकारी है। हमें ऐसा विकास करना चाहिए जो मनुष्य, जीव-जन्तु और पेड़-पौधों के विनाश का कारण न बनें।

उन्होनें आगे कहा कि हिन्दू संस्कृति में वृक्ष को देवता मानकर पूजा करने का विधान हैं। वृक्षों की पूजा करने के विधान के कारण हिन्दू स्वभाव से वृक्षों का संरक्षक हो जाता है। हिन्दू दर्शन में एक वृक्ष की मनुष्य के दस पुत्रों से तुलना की गई है। भारतीय संस्कृति एवं जीवन शैली हमेंशा से पर्यावरण संरक्षण की पोषक रही है। भारतीयों के विचार में वन के साथ-साथ वन्य जीवन की रक्षा भी महत्त्वपूर्ण मानी गई है।

 
    आचार्य जी ने आगे बताया कि आज की युवा पीढ़ी नशे की लत में डूब रही है। नशा बीमारियों तो बढ़ा सकता है, लेकिन तनाव दूर नहीं कर सकता। नशा हमारे लीवर, किडनी को खत्म कर देता है। इंसान को भक्ति के बारे में जागरुक करते हुये उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति करनी बहुत जरूरी है। ईश्वर भक्ति है तो सब कुछ संभव है। इसके माध्यम से हम संस्कारों से जुड़ते हैं। हम अपनी संस्कृति को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

     उन्होनें आगे कहा कि अगर वर्तमान में हो रहे विकास का आनन्द लेने वाला ही नहीं रहेगा तो इस आधुनिक विकास का क्या फायदा। आचार्य श्री ने आगे दुःख प्रकट किया कि जल का संकट दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं। पेड़ कट रहे है और उनकी जगह नए मार्ग, भवन, पुल आदि को निर्मित किया जा रहा है। पेड़ो की अनुपस्थिति में मनुष्य और जीव-जन्तु की कल्पना भी मिथ्या हैं।

      इस अवसर पर जैन मन्दिर के प्रधान नरेश जैन (धनकोट), उपप्रधान रवि जैन, महासचिव अशोक कुमार जैन, सह-सचिव जितेन्द्र जैन, कोषाध्यक्ष सलेन्द्र जैन, पूर्व प्रधान पुष्पचंद जैन, जैन समाज के प्रवक्ता एडवोकेट अभय जैन आदि गणमान्य व्यक्तियों ने अपना योगदान दिया