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ईसानगर/धौरहरा – बर्बाद हो रही फसलों से अन्नदाता की टूटी आस ,कर्ज में डूब रहा किसान

बर्बाद हो रही फसलों से अन्नदाता की टूटी आस ,कर्ज में डूब रहा किसान

गत वर्ष से लेकर अब तक बकाया गन्ना भुगतान के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे अन्नदाता की स्थिति तब और बिगड़ने लगी जब महाजनू ब्याज पर कर्ज़ लेकर किसानों ने अपनी फसल की परवरिश की और भारी संख्या में घूम रहे आवारा मवेशियों द्वारा किसानों की फसलों को तहस-नहस किया जाने लगा अनगिनत उपाय करने के बाद भी अधिकांश किसान अपनी फसलों को बचाने में नाकाम रहे। फसलों के नुकसान के बाद अन्नदाता आर्थिक तंगी के दलदल में धंसता चला गया। स्थिति यह है कि जीविका के साथ साथ अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई , इलाज व घरेलू जिम्मेदारियां निभाने में अन्नदाता स्वयं को लाचार महसूस करते हुए अनगिनत कठिनाईयों से जूझ रहा है।

आवारा पशुओं की समस्या हो या बकाया गन्ना भुगतान आदि को लेकर शिकायती पत्र थाम कर सरकारी अप्सरानो की परिक्रमा करके थक चुके अन्नदाता को चुनाव नजदीक आने पर केवल एक ही उम्मीद थी। अन्नदाता की इस उम्मीद पर खरे उतरे यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने चुनाव नजदीक आते ही लोकसभा चुनाव में किसानों की ज्वलंत समस्या से वोट बैंक को खिसकता देख तत्काल अस्थाई गौशाला निर्माण का फरमान सुना दिया यही नहीं आनन-फानन में अधिकारियों ने तेजी पकड़ भूमि खाली करवाकर चुनाव से पूर्व ही अस्थाई गौशाला निर्माण की शुरुआत कर इतिश्री कर ली। ग्रामीणों की मानें तो वोट बैंक के लालच में अस्थाई गौशाला निर्माण की शुरुआत तो हो गई लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कछुआ चाल से चल रहे गौशाला निर्माण कार्य से अन्नदाता की बड़ी समस्या का अंत नहीं हो सका और समस्या जस की तस बनी हुई है क्योंकि अभी तक आवारा मवेशी किसानों की फसलें बर्बाद करते हुए आजाद घूम रहे हैं वहीं आर्थिक तंगी का दंश झेलते हुए आंसू बहाने को मजबूर हो रहा है और आवारा मवेशियों से अपनी फसल की सुरक्षा के लिए खेतों में डेरा डाले हुए है।

आवारा घूमते हुए खेतों की फसलों को खाकर ये मवेशी इतने खूंखार हो चुके है कि कभी कभी तो ये मवेशी अन्नदाता को अस्पताल तक पहुचाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।जिस फसल को किसान अपनी गाढ़ी मसक्कत की कमाई व महाजनू ब्याज पर लाई गई रकम से अपने खेत की फसल की समय समय पर परवरिश करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है उसी फसल को ये आवारा मवेशी चंद समय मे नष्ट कर देते हैं जिससे अन्न दाता की आशाओं पर पानी फिर जाता है औऱ अन्नदाता आर्थिक तंगी का दंश झेलते हुए आंसू बहाने को मजबूर है।

रिपोर्ट-अनुपम मिश्रा,India now24