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टीबी रोग को खत्म करने के लिए सरकारी अस्पताल में मुफत ईलाज के साथ मरीज को 500 प्रतिमाह पोषण भत्ता भी दिया जा रहा

टीबी रोग को खत्म करने के लिए सरकारी अस्पताल में मुफत ईलाज के साथ मरीज को 500 प्रतिमाह पोषण भत्ता भी दिया जा रहा

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरूग्राम । टीबी रोग को जड़मूल से खत्म करने के लिए अब सरकारी अस्पताल में मुफत ईलाज के साथ-साथ मरीज को 500 प्रतिमाह पोषण भत्ता भी दिया जा रहा है ताकि वह अपने खाने में पोषक तत्व भी ले सके।

उपायुक्त अमित खत्री की अध्यक्षता में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उनके कार्यालय में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. विजय हैं। सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा ने बताया कि टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिस मरीज को टीबी होने की पुष्टि हो जाती है उसे पूरे ईलाज के दौरान 500 रूपए की राशि हर महीने पोषण के लिए दी जाती है जो उसके सीधी बैंक खाते में डाली जा रही है। इस मद में 1 अपै्रल 2018 से लेकर अब तक 34 लाख रूपए की राशि गुरूग्राम जिला में टीबी मरीजों में बांटी जा चुकी है।

डा. राजौरा ने बताया कि यदि किसी प्राईवेट डाॅक्टर द्वारा टीबी मरीज की पहचान की जाती है तो उसके लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह स्वास्थ्य विभाग के शैड्यूल एच-1 रजिस्टर में उसकी एंट्री करवाए। ऐसा करने वाले प्राईवेट चिकित्सक को भी 500 रूपए प्रति मरीज दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जो आशा वर्कर अपने कार्यक्षेत्र में टीबी से पीड़ित मरीज की पहचान करके उसकी सूचना नागरिक अस्पताल में देती है तो उसे 500 रूपए की राशि प्रति मरीज दी जा रही है और यदि वह आशा वर्कर उस मरीज का पूरा ईलाज करवाने में सहयोग देती है तो उसके लिए भी अलग से 500 रूपए की राशि दी जा रही है। इस प्रकार एक टीबी मरीज के लिए आशा वर्कर को एक हजार रूपए की राशि प्राप्त हो रही है।

डा. राजौरा ने बताया कि अब दवा विक्रेताओं के लिए भी यह अनिवार्य किया गया है कि वे टीबी रोग के ईलाज की दवा केवल डाॅक्टर द्वारा लिखी पर्ची पर ही देंगे और उसकी एंट्री शैड्यूल एच-1 रजिस्टर में करेंगे। उन्होंने बताया कि प्राईवेट अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि जब भी किसी टीबी के मरीज की पहचान होती है तो उसकी सूचना वे नागरिक अस्पताल में अवश्य दें ताकि उस मरीज को ईलाज के लिए निःशुल्क दवा उपलब्ध करवाई जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि टी बी रोग का ईलाज संभव है परंतु इसके लिए मरीज को पूरा कोर्स करना पडे़गा अर्थात् दवा समय पर पूरी अवधि के लिए लेनी होगी। डाक्टर राजौरा ने कहा कि दवा बीच में छोड़ने पर मरीज का ईलाज होना कठिन हो जाता है जिसके कारण यह बीमारी उसके लिए जानलेवा भी हो सकती है। सिविल सर्जन ने जिला के सभी टीबी से ग्रस्त मरीजों से अपील की है कि वे दवा नियमित रूप से लें।