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वालमार्ट फाउंडेशन ने 10000 स्मॉलहोल्डर किसान परिवारों की आय बढाने के लिए आईडीईआई सिंचाई परियोजना को समर्थन दिया

वालमार्ट फाउंडेशन ने 10000 स्मॉलहोल्डर किसान परिवारों की आय बढाने के लिए आईडीईआई सिंचाई परियोजना को समर्थन दिया

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

वालमार्ट फाउंडेशन ने इंटरनेशनल डेवलपमेंट एंटरप्राइस.इंडिया ;आईडीईआईद्ध के कार्यक्रम के तहत पेश की गई टिकाउ सिंचाई उत्पाद एवं व्यवस्था को फंड और सहयोग उपलब्ध कराने की पहल की है। इससे आंध्र प्रदेश में 10000 स्मॉलहोल्डर के किसान लाभान्वित होंगे।

वालमार्ट फाउंडेशन 750000 डॉलर का अनुदान उपलब्ध कराते हुए स्मॉलहोल्डर किसानों को बाजार प्रणाली के कार्यक्रम में एकीकृत करने में इस राज्य के 10 जिलों में आईडीईआई की मदद करेगा। इस कार्यक्रम का लक्ष्य टिकाउ सिंचाई उत्पाद एवं व्यवस्था शुरू करना और एक ऐसी पूरक सहयोग पारितंत्र तैयार करना है जिससे किसानों की उपज बढेए नकारात्मक वातावरण का प्रभाव घटे और बाजार में पहुंच बढने के साथ स्मॉलहोल्डर किसानों की आय बढे।

इस कार्यक्रम से इस राज्य में परियोजना अवधि के अंत तक किसानों की वार्षित आय में अतिरिक्त 74 लाख डॉलर का सृजन होने की संभावना है जिसमें प्रति किसान परिवार की सालाना आय में 400 डालर का लाभ होगा। कृषि में काफी मात्रा में जल बचने से इस कार्यक्रम के दौरान 3ण्34 करोड घन मीटर पानी बचने का अनुमान है।

आंध्र प्रदेश की 62 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि पर आश्रित है और कई किसान गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं और सिंचाई व्यवस्था या अन्य प्रौद्योगिकी का उनके पास अभाव है जिससे उनकी उत्पादकता और आय बढाने में मदद नहीं मिल पा रही है।

व्यवस्थाओं के साथ टिकाउ कृषि उत्पाद आईडीईआई कार्यक्रम के प्रमुख घटक हैं। इसके तहत सिंचाई सुविधा के साथ स्मॉलहोल्डर किसान परिवारों को लक्षित किया जाएगा और उन्हें बाजार उन्मुखी विकास के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। टिकाउ सिंचाई प्रणाली से स्मॉलहोल्डर किसानों को रोपाई और फसल कटाई में मदद मिलेगीए उनकी उपज बढेगी और वह विविध किस्म के फसल लगाकर उत्पादकता बढा सकेंगे और बाजार में नए अवसरों का लाभ उठा सकेंगे। इससे उनकी लागत भी बचेगी और अतिरिक्त जल की खपत कम कर नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को घटाने व डीजल की खपत घटाने में भी मदद मिलेगी।

आईडीईआई उद्यमियों का एक पारितंत्र विकसित करने के लिए भी काम करेगा जिससे किफायती जल उपयोग उत्पादकता प्रौद्योगिकी तक पहुंच सुलभ हो सके और इन व्यवस्थाओं का रखरखाव बनाए रखा जा सके। इन पूरक गतिविधियों से आंध्र प्रदेश के लक्षित क्षेत्रों में आर्थिक अवसर और बढाए जा सकेंगे।

आईडीईआई के मुख्य कार्यकारी अमिताभ सादंगी ने कहाए श्निर्धनता से दुनियाभर में 13 अरब लोग प्रभावित हैं और यह एक बडी चुनौती है। लेकिन किफायती आधुनिक सिंचाई जैसे आसान समाधान एक बडा बदलाव ला सकते हैं। हम पहले ही किसान परिवारों के 80 लाख से अधिक लोगों की उपज बढाने में और उनका जीवन स्तर उठाने में मदद कर चुके हैं और अब हम आंध्र प्रदेश में 10000 स्मॉलहोल्डर किसानों के लिए यह करने को संकल्पबद्ध हैं।

तमिलनाडु के लघु किसान अंगामुतु ने एक ड्रिप किस्म की सिंचाई्र व्यवस्था स्थापित की है। उसने कहाए श्पहले हमारे पास पर्याप्त धन नहीं था जिससे हम अपनी मदद कर सकें लेकिन अब हमारे पास अधिशेष धन है जिससे हम हमारे बच्चों को शिक्षा दे पा रहे हैं और इसकी वजह उपज का बढना है। इसके लिए आईडीईआई द्वारा प्रोत्साहित ड्रिप से मदद मिली है।

आईडीईआई का अनुदान वालमार्ट फाउंडेशन की प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसकी घोषणा सितंबरए 2018 में की गई। फाउंडेशन ने अगले पांच साल के दौरान भारत में किसानों की आजीविका सुधारने के लिए परोपकारी पहल में 25 करोड डॉलर ;करीब 180 करोड रूपये निवेश करने की घोषणा की थी।

इस प्रतिबद्धता के साथए वालमार्ट फाउंडेशन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन ;एफपीओ को सशक्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो टिकाउ मध्यस्थ के तौर पर काम करते हैं और इनसे छोटे किसानों को अपनी आय और आजीविका बढाने में मदद मिलती है। इसका लक्ष्य एफपीओ और उनके किसान सदस्यों को सहयोग करना है जिससे टिकाउ किसानी व्यवस्था विकसित की जा सके और प्राथमिक जिंसों में मूल्यवर्धन किया जा सके और वित्त एवं बाजार तक उनकी पहुंच बढाई जा सके। इस प्रतिबद्धता के तहत पिछले वर्ष आंध्र प्रदेश में सेमी एरिड ट्रॉपिक्स के लिए इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट को करीब 20 लाख डॉलर का अनुदान शुरू किया गया और एक मूंगफली प्रोसेसिंग इकाई का लोकार्पण किया गया।

वालमार्ट फाउंडेशन के वरिष्ठ निदेशक कैरी डेनिस्टन ने कहाए श्हमें आईडीईआई जैसे संगठनों का सहयोग करते हुए खुशी है जिनके पास विशेषज्ञता है और किसानों के कृषि कौशल को बढाने का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। इस दृष्टिकोण से उत्पादन बढाकर किसानों के लिए टिकाउ आजीविका का सृजन करने और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने में मदद मिलेगी।

आईडीईआई के बारे में

इंटरनेशनल डेवलपमेंट एंटरप्राइस इंडिया ;आईडीईआईद्ध एक भारतीय गैर लाभकारी उपक्रम है जो गरीबीए भूख और कुपोषण के लिए दीर्घकालीन समाधान उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। यह किफायती प्रौद्योगिकियों के लिए मांग तैयार कर एक टिकाउ एवं मुक्त बाजार के विकास को प्रोत्साहित करता है और एक टिकाउ आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करता है। आईडीईआई ने भारत में 15 राज्यों में काम किया है। पिछले कुछ वर्षों में आईडीईआई 15 लाख छोटे किसानों तक पहुंचा है जिससे 80 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। छोटी जोत को अधिक लाभप्रद बनाना और गरीबी घटाना आईडीईआई का मुख्य दर्शन है। आईडीईआई की प्रौद्योगिकी अन्य समाधानों की तुलना में एक चैथाई से भी कम लागत के लिहाज से डिजाइन है और एक हेक्टेयर के दसवें भाग के हिसाब वाले भूखंडों के लिए भी उपयुक्त है। इससे किसान बिना सब्सिडी वाले बाजार मूल्य पर बिक्री करने में समर्थ होते हैं। आईडीईआई की प्रौद्योगिकियों में ट्रेडल पंप और ड्रिप व स्प्रिंकल सिंचाई प्रणाली शामिल है। इन कम लागत वाले समाधानों को हाथ से संचालित किया जा सकता है और इनका रखरखाव करना भी सस्ता है जिससे निवेश पर अधिक रिटर्न प्राप्त होता है। औसतन इनसे किसानों को सालाना 400 डालर की अतिरिक्त आमदनी करने में मदद मिलती है।

वालमार्ट में परोपकार के बारे में

वालमार्ट और वालमार्ट फाउंडेशन लोगों के लिए बेहतर जीवन के लिए अवसरों का सृजन करती हैं। वालमार्ट के स्टोर्स 27 देशों में है जहां 22 लाख लोग कार्यरत हैं और हजारों आपूर्तिकर्ताओं के साथ कारोबार कर रहे हैं जो बदले में लाखों लोगों के लिए रोजगार दे रहे हैं। हमारे परोपकार से लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलती है। कंपनी इसके लिए रोजगार सृजन करती है और रिटेल क्षेत्र के लिए आर्थिक विकास का काम करके भूख की समस्या से निपटती है। कंपनी जहां भी परिचालन करती है वहां समुदायों को मजबूती प्रदान करती है और अपने सहयोगियों को समाज को लौटाने के लिए प्रेरित करती है।