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गुरूग्राम व फरीदाबाद मण्डलों की भजन पार्टियांे तथा खण्ड प्रचार कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

गुरूग्राम व फरीदाबाद मण्डलों की भजन पार्टियांे तथा खण्ड प्रचार कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरूग्राम । सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा द्वारा गुरूग्राम व फरीदाबाद मण्डलों की भजन पार्टियांे तथा खण्ड प्रचार कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई जिसमें प्रख्यात रंगकर्मी महेश वशिष्ठ मुख्य अतिथि थे।

कार्याशाला के प्रतिभागीयों को संबोधित करते हुए श्री वशिष्ठ ने कहा कि विभाग के लोक कलाकार अपनी रचनाओं में आम लोगों से जुड़ाव लेकर आएं। लोगों से जुड़ाव होगा तो यह सवाल ही नही उठता कि वे आपकी ना सुने। उन्होंने कहा कि कलाकार को भीड़ का व्यक्ति बनकर रहना चाहिए अर्थात् वह जब अपनी कला का प्रदर्शन करे तब उसे लोग पहचाने और सामान्यतः वह साधारण व्यक्ति की तरह लोगों के बीच मंे रहे तभी उसकी कला  का प्रदर्शन ज्यादा प्रभावी होगा।

उन्होंने कहा कि अब प्रोद्यौगिकि का युग है और ऐसे में लोक कला के साथ तकनीक को अपनाकर हम हमारी लोक कला को और उभार सकते हैं। श्री वशिष्ठ ने कहा कि वाद्य यंत्रों में भी तकनीक आ गई है, जिसका प्रयोग करके कलाकार व गायकों की संख्या कम होने के बावजूद भी वे एक साथ गई वाद्य यंत्रों की धुन बजा सकते हैं। प्रोद्यौगिकि में इन दिनों आ रहे नए-नए गैजेट्स का जिक्र करते हुए श्री वशिष्ठ ने कहा कि ये गैजेट हमें मशीन बना रहे हैं लेकिन कला और मशीन का कोई मेल नही है। उन्होंने सभी प्रतिभागी लोक कलाकारों को शारीरिक श्रम करने और प्रकृति से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेगा वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ होगा। इसी प्रकार, प्रकृति इंसान का सबसे बड़ा गुरू है, इसके साथ जितना जुड़ाव होगा, उतना ही हम कला को सृजित कर पाएंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कहा कि सबसे पहले हमें अपनी मौजूदा परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए। चाहे कितनी भी विकट परिस्थितियां आए, कलाकार खुश होकर काम करे। जैसा हमारा जीवन है उसी में हम राहत महसूस करें तो हमारे अंदर खुशी पैदा होगी।

आज की कार्यशाला में राजकीय महाविद्यालय सैक्टर-14 के संगीत प्राध्यापक लोकेश ने भी सभी प्रतिभागियों को संगीत की धुनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से वे अपने गायन को ज्यादा प्रभावशाली बना सकते हैं। लोकेश ने क्रियात्मक लेखन के टिप्स भी इन लोक कलाकारों को दिए और संगीत के उतार-चढाव के बारे में बताया।

इससे पहले कार्यशाला के बारे में जानकारी देते हुए सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के उपनिदेशक आर एस सांगवान ने बताया कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और इस समय का सदुपयोग करते हुए विभाग के प्रचार अमले के कौशल में निखार लाने के लिए करने को इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में गुरूग्राम तथा फरीदाबाद मण्डलों के अंतर्गत पड़ने वाले सभी 6 जिलों की भजन पार्टियां तथा खण्ड प्रचार कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग के प्रचार अमले के स्किल में सुधार लाने के प्रयास इस तीन दिवसीय कार्यशाला में किए जाएंगे ताकि ये लोक कलाकार आज के आधुनिक युग में उत्पन्न चुनौतियों का आसानी से सामना कर सकें और लोक कला व आधुनिक संगीत का समावेश करके प्रचार के तरीकों को ज्यादा प्रभावशाली बना सकें।