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इंसुलिन इंजेकशन डे पर सही तकनीक पर दिया जोर

वैन न्यूज एजेंसी
रिर्पोट पंकज ब्यूरो चीफ
कानपुर

इंसुलिन इंजेकशन डे पर सही तकनीक पर दिया जोर
सुरक्षित इंसुलिन इंजेक्श अभयासों पर जागरूकता अभियान का आयोजन

कानपुर नगर, मधुमेह भारत में एक महामारी बन चुका है और अध्ययन बताता है कि 2030 तक भारत में 98 मिलियन लोग टाइप 2 डायबीटीज का शिकार हो सकते है। मधुमेह और उसके प्रबंधन में इंसुलिन और उसके इंजेक्षन की सही तकनीक महत्वपूर्ण है यह बात एक वार्ता के दौरान रीजेंसी हाॅस्पिटल के संेटर फाॅर डायबीटीज एंड एंडोक्राइन डिजीज तथा हेड आफद द डीपार्टमेंट डा0 ऋषी शुक्ला ने कही।
उन्होने कहा रोगी इंसुलिन नही लेना चाहते क्योंकि वह सुई से डरते है और डरते है कि उन्हे इसे जीवन भर लेना होगा। हलांकि इंसुलिन लगाने की सही तकनीक पर जागरूकता से लोग उपचार अपनायेंगे, अनुपालन करेंगे और मधुमेह का बेहतर प्रबंधन होगा। कहा बीडी इंडिया के साथ वह काम करके खुश है जिसमें विशेषज्ञो की टीम ने रोगियों को सही इंजेक्षन तकनीक पर शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अपनायी है। मधुमेह चिकित्सा में भागदीार के तौर पर अपनी भूमिका रेखांकित करते हुए पवन मोचेरला ने कहा मधुमेह के प्रभावी प्रबंधन में इंसुुलिन आपूर्ति तकनीक की शिक्षा महत्वपूर्ण है। कहा इंसुलिन इंजेक्शलन डे हमारे लिए इंसुनिल थैरेपी के प्रबंधन में सर्वश्रेष्ठ तरीकों के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हमारे लिए बिल्कुल उपयुक्त अवसर है। कहा हमें पूरा भरोसा है कि सही इंसुनिल इंजेक्शन तकनीक पर जागरूकता फैलाने के इस तरह के सहयेागी प्रयसों से हम भविष्य में मरीजों को बेहतर परिणाम प्रदान करने में सक्षम हो पायेगे। बताया 1924 में पहली इंसुनिल सिरिंज 1999 में पहले 5 एमएम केपेने नीडल और दुनिया के पहले 4 एमएम पेन नीडल शामिल है। इनके द्वारा अब इंसुलिन का इंजेक्षिन लेने एवं देने की अच्दी तकनीकों के बारे में डाक्टरो और मरीजों को शिक्षित किया जा रहा है।