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अधिकारी जानकारी उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे

अधिकारी जानकारी उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे
आरटीआई एक्ट को अधिकारी नहीं देते महत्व
आवेदनकर्ताओं को मिली रही है झूठी दिलासा

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम । प्रदेश सरकार भले ही पारदर्शिता का ढोल पीटते नहीं थकती, किंतु हकीकत इसके विपरित है। आरटीआई अधिनियम में बरती गई ढ़ील के कारण एक्ट मजाक बन कर रह गया है। जिसका लाभ विभागीय अधिकारी उठा रहे हैं। वहीं सूचना मांगने वाले कार्यकर्ता को दर दर भटकना पड़ रहा है। एेसा की एक मामला खंड के गांव मुशैदपुर में सामने आया है। जिसमें आरटीआई कार्यकर्ता चंदन सिंह ने गांव की सामलात भूमि पर मालिकाना हक से संबधित जानकारी मांगी है। लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी जानकारी उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे है।
आरटीआई कार्यकर्ता चंदन सिंह ने बताया कि गांव मुशैदपुर की शामलात भूमि पर मालिकाना हक के लिए माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा सीडब्ल्यूपी 3985 / 1999 में दिए गए आदेश दिनांक 13 मार्च 2003 की पालना में राजस्व विभाग द्वारा 24 जनवरी 2006 को  इंकतकाल नं 641 जमाया गया। जिसे 17 मार्च 2006 को रद्द कर दिया गया था। आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई सूचना में सच सामने आया कि जिस आदेश का हवाला देकर इंतकाल नं. 641 को रद्द किया गया था, एेसा कोई आदेश फाईल में उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों द्वारा उपायुक्त गुरुग्राम को 15 जनवरी 2018 को लिखे पत्र से इस फर्जीवाडे़ की जांच करने और इंतकाल नंबर 641 को बहाल करने की गुहार लगाई गई। लेकिन उपायुक्त कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिले पर आवेदक द्वारा गुरुग्राम कार्यालय के राज्य जन सूचना एंव डीआरओ को एक आरटीआई लगाई , कि डीसी कार्यालय द्वारा ग्रामीणों के आवेदन पर क्या कार्रवाई की गई।
आरटीआई के जवाब में डीआरओ ने बताया कि सूचना शुन्य है। जिस पर जिला उपायुक्त को प्रथम अपील लगाई गई। अपील में जनसूचना अधिकारी ने 4 जून 2018 एक सप्ताह में सूचना देने के आदेश पारित किये थे। बावजूद इसके भी कोई सूचना नहीं मिली। आवेदक ने राज्य सूचना आयुक्त को दूसरी अपील लगाई , जिस पर सूचना आयुक्त ने अपने आदेश 10 दिसम्बर 2018 में राज्य सूचना जन अधिकारी एंव डीआरओ को निर्देश दिये कि अगर उनके कार्यालय में कोई सूचना नहीं है तो वह इस बारे सम्बधित अधिकारी से सत्यापित हल्फनामा दें। वरना उनके खिलाफ आरटीआई एक्ट के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। किंतु जन सूचना अधिकारी ने इस बारे में कोई सूचना व शपथ पत्र नहीं दिया है। जिसकी सूचना आयुक्त को कर दी गई है। देखना यह है कि आरटीआई कार्यकर्ता को न्याय मिलता है कि नहीं।