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सवर्ण आरक्षण से जुड़ा बिल राज्यसभा में भी पास

सवर्ण आरक्षण से जुड़ा बिल राज्यसभा में भी पास, पक्ष में 165 और विपक्ष में 7 वोट, जानें आगे क्या होगा?

10 घंटे की बहस के बाद पास हुआ बिल, बिल को मोदी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

नई दिल्ली. सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन का बिल राज्यसभा में भी पास हो गया। कल बिल को लोकसभा में पास किया गया था। राज्यसभा में बिल के पक्ष में 165 और विपक्ष में 7 वोट पड़े। बिल को लेकर चर्चा करने के लिए 8 घंटे का समय तय था लेकिन उसे बढ़ाना पड़ा। करीब 10 घंटे की चर्चा के बाद बिल पास हुआ। चर्चा के दौरान विपक्ष ने कहा कि हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम बिल को पेश करने के सरकार के तरीके के खिलाफ हैं। कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर 8 लाख रुपए कमाने वाला गरीब है तो सरकार को 8 लाख तक की कमाई पर इनकम टैक्स भी माफ कर देना चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्य चाहें तो 8 लाख रुपए की सीमा को घटा-बढ़ा सकते हैं।
अब आगे क्या : राज्यसभा में पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति उसे मंजूरी देंगे, जिसके बाद ये बिल कानून बन जाएगा। बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के खिलाफ 155 वोट पड़े थे। संविधान संशोधन बिल को देश की 50 फीसदी विधानसभाओं से भी पास कराना होता है, लेकिन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कल लोकसभा में कहा था, ‘इस बिल को 50 फीसदी राज्य विधानसभा से मंजूरी की जरूरत नहीं है। संविधान में मूलभूत अधिकारों के प्रावधान के संबंध में ऐसी जरूरत नहीं पड़ती। पदोन्नति में आरक्षण के समय भी ऐसा ही हुआ था।

किसे मिलेगा लाभ : आरक्षण का फायदा उन सवर्णों (Swarn) को मिलेगा, जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है या जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती की जमीन (Agriculture Land) है। इसके अलावा जिसके पास 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है, वो भी लाभ के दायरे में आएंगे। कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस श्रेणी में ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ, राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को आरक्षण मिलेगा। इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा। यह 10% आरक्षण मौजूदा 49.5% कोटे के अलावा होगा। आरक्षण लागू कराने के लिए सरकार को संविधान संशोधन विधेयक पारित कराना होगा, जो मंगलवार को पेश किया जा सकता है।

आरक्षण राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा :रविशंकर प्रसाद ने कहा- यह आरक्षण सिर्फ केंद्र सरकार की नौकरियों या केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा। यह राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा। आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं कि अभी इस बिल को क्यों ला रहे हैं। आपको किसने रोका था इस बिल को लाने के लिए? हम सभी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और मैं मानता हूं कि इस मुद्दे को समझने की कोशिश सभी ने की है। गांव में जाइए और आपको पता चलेगा कि अगड़े वर्ग के लोग भी गरीब हैं।


राज्य अपने हिसाब से पैमाना तय कर सकेंगे :राज्य चाहें तो पैमाना 5 लाख भी कर सकते हैं : कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष से कहा- आप विधेयक में 8 लाख की आय सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन बिल में प्रावधान है कि राज्य अपनी मर्जी से जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का पैमाना तय कर सकेंगे। उदाहरण के लिए किसी राज्य को लगता है कि आमदनी का पैमाना 8 लाख रुपए नहीं 5 लाख रुपए होना चाहिए तो वह ऐसा कर सकेगा। संवैधानिक संशोधन के जरिए राज्यों को यह निर्णय करने का अधिकार रहेगा।

आप तीन राज्यों में नहीं हारते तो क्या यह बिल लाते : कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा कि आप राजनीति के लिए तीन तलाक बिल लाए, मुस्लिम महिलाओं की बात की। लेकिन, दूसरी महिलाओं का क्या होगा? अगर आप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव नहीं हारे होते तो यह सवर्ण आरक्षण बिल कभी नहीं लाते। जब आप जीत नहीं पाए तो आपने इस बारे में सोचा। भाजपा को अब अहसास हुआ कि कुछ गलती कर रहे हैं। कितने लोग 8 लाख से ज्यादा कमाते हैं? सच यह है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम भी इस मुद्दे का समर्थन करते हैं।”

Shivam Tiwari
   Reporter
India Now24