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‘पटौदी की एमएलए’ बिमला की ससुराल में ‘पीले हाथी का पंच’

‘पटौदी की एमएलए’ बिमला की ससुराल में ‘पीले हाथी का पंच’

मलकीयत की रजीस्ट्रियां भी पीले पंजे को नहीं रोक पाई

‘फर्रुखनगर में दूसरे दिन’ भी चलता रहा ‘पीला हाथी’

यहां  सात दर्जन दुकानों के सामने बने अतिक्रमण ध्वस्त

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम । पीएम मोदी मंत्रीमंडल में वजीर केंद्र में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के गुट से पटौदी की एमएलए बिमला चौधरी की ससुराल फर्रूखनगर नगरपालिका क्षेत्र में दूसरे दिन मंगलवार को भी ‘पीला हाथी’ बेखौफ झूम के ‘अतिक्रमण पर चलता रहा’। अतिक्रमण पर पीले पंजे ने दूसरे दिन भी फर्रुखनगर के मुख्य बाजार व बस अड्डे पर जमकर तोडफ़ोड़ की। कार्रवाई में आई छुटपुट बाधाओं और जमीन के नक्शे दास्तावेज आदि को दर किनार करके पालिका सचिव के के यादव ने पीले पंजे की बनी हुई चाल को थमने नहीं दिया।

डयूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार प्रदीप पहावा के समक्ष लोगों ने अपनी दुकानों, चबुतरों की रजीस्ट्रियां रखी परंतु वहां भी दुकानदारों को कोई राहत नहीं मिली और असहाय होकर पीले पंजे को खून पसीने से तैयार अपनी ही जमीन पर बनाये निर्माण को टूटता देखते रहे । तोडफ़ोड़ की कार्रवाई के दौरान असहाय दुकानदार अपने जन प्रतिनिधियों को भी कौसते नजर आये। दुकानदारों के बार बार आग्रह पर भी कोई पालिका पार्षद / नेता पीले पंजे की गति में बाधा बनना तो दूर दुकानदारों की बाते सुनने के लिए  भी नहीं पहुंचा। पीले पंजे ने दूसरे दिन भी करीब सात दर्जन दुकानों के सामने बने चबूतरे, टीन यौड धवस्त कर डाले। गुस्साये दुकानदारों ने प्रशासनिक अधिकारियों को कोर्ट में घसीटने की भी धमकी दी, लेकिन सचिव के तेवर में कोई बदलाव नहीं आया और अपने निर्णय पर ही अडिग रहे।

बता दे कि पिछले करीब पांच छह दशक से फर्रुखनगर के मुख्य बाजार में दुकानदारों द्वारा दुकानों के सामने पक्के चबूतरे, टीन शैड के नाम पर अतिक्रमण की शिकायत काफी समय से अधिकारियों को मिल रही थी। लेकिन राजनीतिक कारणों के कारण अधिकांश दुकानदार अपने आकाओं के दम पर कब्जा जमाये हुए थे। अवैध कब्जे विकास कार्यो में बाधा बने हुए थे। नपा प्रशासन ने गत दिनों दुकानदारों को अपने अतिक्रमण हटाने के लिए पहले भी चेताया था। लेकिन पूर्व की भांति उन्होंने उस अपील पर गौर नहीं दिया और नपा प्रशासन की कार्रवाई को हलके में लेकर अपने आकाओं के भरोसे पर ही रहे। पीले पंजे ने जैसे ही तोड़ फोड़ की कार्रवाई को आरम्भ किया तो दुकानदार सकते में रह गये, कि पहले तो राजनीतिक आकाओं के फोन से ही ‘पीला हाथी’ रुक जाता था। लेकिन इस बार ‘पीला हाथी’ के पीछे और बड़ी रातनीतिक/शासन/प्रशासन की शक्ति का प्रयोग किया गया। जिसके चलते लोगों के हंगामे और विरोध के बाद भी कार्रवाई आसानी से आगे बढ़ती ही रही