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दो साल पहले सीबीआई के सिफारिस पर यमुना घाट के नजदीक कई हजार घन मीटर सीज की गई तो मोरंग

दो साल पहले सीबीआई के सिफारिस पर यमुना घाट के नजदीक कई हजार घन मीटर सीज की गई तो मोरंग।

कौशाम्बी। यमुना की तलहटी से निकलने वाली मोरंग बालू जिसे स्थानीय भाषा मे लाल सोना कहा जाता है उसके खनन में जमकर खेल होता है। जिले में एक दर्जन घाटों से मोरंग का खनन सरकारी आदेशों पर होता है लेकिन इन्हीं घाटों पर नियमों का जमकर माखौल उड़ाया जाता है। अवैध खनन में एनजीटी के नियमों को ताक पर रख दिया जाता है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सीबीआई को सौंपा था। जांच के दौरान सीबीआई ने आठ बालू घाटों के नजदीक कई हजार घनमीटर बालू सीज किया था। दो साल पहले सीज की गई बालू धीरे-धीरे गायब हो गई।

जिले के बालू माफियाओं के अंदर सीबीआई का भी खौफ नही है यदि बालू माफियाओं के अंदर थोड़ा सा भी खौफ होता तो दो साल पहले सीज की गई बालू यूं ही गायब न हो जाती। जानकारों की माने तो सीज की गई बालू को खनन विभाग की मिलीभगत से बालू माफियाओं ने बेंच डाला। लगभग बीस हजार घनमीटर बालू सीज की गई थी जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये बनती है जब तक सीबीआई जिले में आती रही तब तक बालू माफियाओं में हड़कप का माहौल रहा लेकिन जैसे ही सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट हाइकोर्ट में दाखिल की उसके बाद से बालू माफिया फिर से अपने खेल में जुट गए। बेधड़क मंहगे दामों पर बालू बेंचकर रातों-रात अपनी तिजोरी भर ली। सीज बालू बेचे जाने को लेकर खनन विभाग ने दो कारोबारियों के खिलाफ पश्चिमशरीरा थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था। इसके बाद भी बालू कारोबारी अपने खेल में मशगूल रहे। हैरत की बात तो यह है कि खनन निरीक्षक राज रंजन सीबीआई के सिफारिश पर बालू सीज किये जाने के मामले को ही सिरे से नकार रहे हैं। सवाल यह कि जब सीज बालू को बेचा ही नही गया तो फिर एफआईआर किस बात की इस पर खनन अधिकारी चुप्पी साध जाते हैं। कुल मिलाकर जिले में बालू खनन का खेल बेधड़क बिना खौफ के जारी है।

मनोज सिंह ब्योरो चीफ