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बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी: स्वाति यादव

बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी: स्वाति यादव

-यूरो इंटरनेशनल स्कूल में हुई सकारात्मक अभिभावक संगोष्ठी

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम। यह जरूरी है कि हर व्यक्ति को शिक्षित होना चाहिए। शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती। फिर भी बच्चों को जब हम शिक्षा देते हैं तो उन्हें शिक्षा के साथ संस्कार भी दें, ताकि वे सफल व्यक्ति बनने के साथ संस्कारी भी बनें। यह बात यूरो गु्रप ऑफ स्कूल्स की निदेशक स्वाति यादव ने अंतरिक्ष हाइट्स सेक्टर-84 में सकारात्मक अभिभावक संगोष्ठी में अभिभावकों व शिक्षकों के साथ बच्चों को संबोधित करते हुए कही।

निदेशक स्वाति यादव ने कहा कि बालक के चहुंमुखी विकास के लिए सर्वप्रथम आवश्यक तत्व हैं अभिभावक तथा शिक्षकगण का सकारात्मकता से परिपूर्ण होना। इसी तत्व को स्मरण रखते हुए यह सकारात्मक अभिभावक संवाद संगोष्ठी रखी गई है। संगोष्ठी में बताया गया कि किस प्रकार अभिभावकों तथा शिक्षकों के सकारात्मक सहयोग लिए से समाज को एक न केवल सफल मानव प्रदान किया जाए, बल्कि कैसे एक अच्छा, सच्चा, सकारात्मकता से परिपूर्ण, संस्कारों तथा संस्कृति का मान रखने वाले एक नागरिक की रचना की जाए। स्वाति यादव ने कहा कि वास्तव में मानव की रचना गभज़् में माता के द्वारा तथा समाज में संस्कारों के द्वारा की जाती है, जो उसे अपने परिवार तथा समाज से मिलते हैं। जो न केवल अपने परिवार के कल्याण तथा उत्थान के लिए कार्यरत रहे, बल्कि अपने देश, देशवासियों तथा सवज़्स्व संसार के लिए सद्भावना, सम्मान, सहानुभूति, प्रेम, सकारात्मकता तथा ऊर्जा से परिपूर्ण हों। अपने आप को मानव जाति पर न्यौछावर होने को तत्पर रहे।

इस मौके पर विद्यालय की प्राचार्या रेणु सिंह ने कहा कि आज समाज में बहुत सी बुराइयां फैली हुई हैं। बच्चों को बुराइयां से दूर रखने के लिए अच्छाई का ज्ञान कराना भी जरूरी है। बच्चे देश के भविष्य निमातज़ हैं। उनका निर्माण इस तरह से किया जाए कि वे देश के विकास में अपना अहम योगदान दे सकें। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को शिक्षा के प्रति कोई तनाव न देकर उन्हें घर में ऐसा माहौल दें, जिससे कि वे शिक्षा को बोझ न समझें। स्कूल में इस तरह का माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। स्कूल की कॉर्डिनेटर निशा भाटिया ने कहा कि बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें हम जैसी शिक्षा देंगें वैसी वे ग्रहण करेंगें। इसलिए हर शिक्षक यह प्रयास रहे कि वे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ संस्कृति का भी ज्ञान कराएं।