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बाबा साहेब ने तीन सिद्धांतों के माध्यम से देश को एक सूत्र में पिरोया : भारद्वाज 

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बाबा साहेब ने तीन सिद्धांतों के माध्यम से देश को एक सूत्र में पिरोया : भारद्वाज 

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम  India Now24

गुडग़ांव। बाबा साहब डा. भीम राव अम्बेडकर ने बराबरी, भाईचारा, स्वतंत्रता के तीन सिद्धांतों के माध्मय से भारत देश को एक सूत्र में पिरोया था। उनकी सोच में इन तीन सिद्धांतों का महत्वपूर्ण स्थान था। उन्होंने ऐसे भारत का सपना देखा था, जिसमें समाज का प्रत्येक वर्ग सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर सशक्त बने।
उक्त विचार वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र कुमार भारद्वाज ने आज भारत रत्न डा. भीम राव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर अपने श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि समाज हमेशा बाबा साहब के प्रेरणादायक जीवन से प्रेरणा प्राप्त करता रहेगा। उनके महान प्रयास ने देश को एक जुट रखने में बहुत मदद की है। डा. भीम राव अम्बेडकर द्वारा लिखित भारत का संविधान अभी भी देश का मार्ग दर्शन कर रहा है और आज भी ये कई संकटों के दौरान सुरक्षित रूप से बाहर उभरने में मद्द कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके आदर्श समाज को सदैव प्रेरित करते रहेंग
उन्होंने कहा कि बाबा साहब को भारतीय समाज में फैली बुराईयों को दूर करने और वंचित वर्गों को उनके अधिकार दिलाने के योगदान के लिए हमेशा याद किया जाता है। उन्होंने बताया कि डा. अम्बेडकर अपने पूरे जीवन में दलितों और अन्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए लड़े। एक सच्चे महापुरूष दलितों के शुभचिंतक तथा भारतीय संविधान निर्माता के रूप में डाक्टर भीम राव अम्बेडकर को सदा आदर से स्मरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में ऐसे कई महापुरूष, मनीषी हुए हैं जिन्होंने शोषितों, वंचितों एवं दलितों को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए जीवनभर प्रयास किये हैं तथागत बुद्ध से लेकर महात्मा ज्योतिराव फुले, संत कबीर, गुरूनानक, बाबा साहब डाक्टर भीम राव अम्बेडकर आदि इस संबंध में उल्लेखनीय माने जाते हैं।
उन्होंने बताया कि डाक्टर अम्बेडकर ने बहिष्कृत, हितकारिणी सभा,  इनडिपेंडेंट लेवर पार्टी, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ व भारतीय बौद्ध महासभा जैसे संगठनों की स्थापना कर दलित आंदोलन की धार को और भी पैना किया। स्वतंत्र भारत का संविधान लिखने का भी मौका उन्हें मिला। संविधान सभा ने उन्हें संविधान निर्माता के रूप में सम्मानित भी किया। कांग्रेस नेता जितेंद्र भारद्वाज ने कहा कि डाक्टर अम्बेडकर जातिवाद और ऊंच नीच की मनुवादी व्यवस्था से आजिज होकर उन्होंने 1935 में अपनी आत्मिक पीड़ा लोगों के सामने घोषणा के रूप में व्यक्त की कि मैं हिन्दू के रूप में पैदा हुआ हूँ वह मेरे वश में नहीं था, किन्तु हिन्दू के रूप में मरूंगा नहीं।