देश राजनीती राज्य होम

एक माह में ही दड़क गई साढ़े तीन लाख की सड़क एक माह भी नही चली पाई नाले की बालू से बनी सीसी सड़क आई बड़ी बडी दरारे

एक माह में ही दड़क गई साढ़े तीन लाख की सड़क

एक माह भी नही चली पाई नाले की बालू से बनी सीसी सड़क आई बड़ी बडी दरारे

सतना जनपद पंचायत ऊँचेहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत देवार में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है यहां के मैनहा गाव में विगत पिछले माह ही आदिवासी बस्ती से आंगनवाड़ी भवन तक 150 मीटर की सड़क 3,50,000 की लागत से
सी सी सड़क का निर्माण किया गया था
जिसमे नियमो के विपरीत पूरी तरह से घटिया मटेरियल का उपयोग करते खजुराहो बालू की जगह स्थानीय , नाले की बालू , व मसाले में सीमेंट की मात्रा बहुत ही कम मिलाकर सड़क की ऊँचाई कम करते रेता मिलाकर निर्माण करने का कार्य करते सड़क पूर्ण कर ली गई । हालांकि निर्माण के समय ही कुछ ग्रामीणों ने विरोध करते कलेक्टर से लेकर जनपद सीईओ तक को जानकारी दी थी पर किसी के कानों में जूं तक नही रेंगी थी
अब प्रमाणस्वरूप महीने भर के अंदर ही सड़क के बीच मे बड़ी बड़ी दरारे आना शुरू हो गई है जिसको लेकर अब ग्रामीणों को भारी रोष है ।

सरपँच पति और सचिव ने कराया था कार्य

महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास में लगी है लेकिन जमीनी स्थिति इससे उलट है खासकर ग्रामीण क्षेत्रो में देखा जाए तो यहां की पंचायतों मे जनप्रतिनिधि भी अधिकार विहीन है और इसका सटीक ताजा उदाहरण देवार पँचायत में देखा जा सकता है यहां की सरपँच रामसखी लोधी है लेकिन उसको अधिकार विहीन रख सभी कामकाज का स्वामित्व उसका पति सुनील लोधी का ही है और उक्त सड़क निर्माण का ठेका भी पँचायत सचिव भूपराज सिंह के मिलीभगत करते निर्माण कराया गया था

फर्जी जॉब कार्ड का उपयोग

सड़क निर्माण में ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि जनपद के अधिकारियों की मिलीभगत से यहां अंधेरी नगरी और चौपट राजा का खेल खेला गया और अधिकारी भी इस बहती गंगा में हाथ धोने से पीछे नहीं हटे ऊपर से लेकर नीचे तक सब का कमीशन बंधा है ग्राम पंचायत में सरपँचपति के खासमखास लोगो के फर्जी जॉब कार्ड भी बना अपने चहेते लोगों के खातों में पैसे डाल निकाल लिया जाता है

पहले भी की जा चुकी है सिकायत. रिपोटर-गीतेश साहू ऊँचेहरा india now 24

इसके पहले भी दो माह पहले भी कई घटिया निर्माण कार्य कराए जा चुके है कुछ माह पहले ही एक सड़क का निर्माण पूर्ण हुआ था कुछ माह के अंदर ही जगह से गिट्टी बाहर निकल आई थी, अब इसी माह में निर्माण की गई सड़क में दरारे आने से साफ तौर पर पता चलता है कि किस तरह से पंचायत प्रतिनिधि और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने सड़क निर्माण कार्य मे मिली-भगत कर भ्रष्टाचार की है । पर बार बार शिकायतों के बाद भी जाच न होने से लोगों में प्रशासन और ठेकेदारों के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला।इसके पहले आचार संहिता का बहाना बनाकर अधिकारी कार्रवाई करने से बचते रहे पर, हकीकत ये है कि जब आचार संहिता नहीं होती तब भी अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं देते।

बिना देखे ही कर दिया जाता है मूल्यांकन

सरकार पंचायतों का कायाकल्प करने के लिए हर साल लाखों करोडों रूपये फंड जारी कर खर्च करती है पर पंचायतों के जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिलीभगत कर का बेहतर उपयोग के बजाये भष्ट्राचार कर अपनी जेब भर लेते है निर्माण कार्य के पूर्ण होने के बाद इंजीनियरों को हिस्सा देकर गलत मूल्यांकन करा लिया जाता है घटिया निर्माण के चलते कुछ माह में ही सड़क दम तोड़ देती है पर इन सब से अधिकारियों को मतलब नही है उन्हें तो केवल उनका कमिशन चाहिए चाहे काम कैसा भी हो। कमिशन मिलते ही घटिया काम भी अछा हो जाता है और एसडीओ इंजीनियर उसे बिना देखे ही मूल्यांकन सत्यापन कर देते है और सरपंच को घटिया निर्माण कार्य कराने का भी पूरा भुगतान हो जाता है।

5 वर्ष की रहती है गारंटी
————————————-वही इससे सम्बंधित विशेषगो की माने तो सीसी सड़क में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता का अभाव रहा तो 5 वर्ष की गारंटी के समय में ठेकेदार को पुनः कार्य कर ठीक करना होता है, अब मामले को दबाने के लिए रोड के ऊपर मिट्टी डलवाकर पानी भरवा देने की बनाई जा रही योजनाएं ताकि मिट्टी दरारों में भर जाए और पता न चले ।