Breaking News देश राजनीती राज्य होम

फिर शुरू हुआ डॉ शिल्पी को हटाने का षड्यंत्र

फिर शुरू हुआ डॉ शिल्पी को हटाने का षड्यंत्र
जांच को आई टीम पर खड़े हो रहे हैं सवाल
पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संविदा पर तैनात गायनोकोलॉजिस्ट डॉ शिल्पी श्रीवास्तव की संविदा समाप्त करने/कहीं और तैनाती देने का षड्यंत्र फिर शुरू हो गया है। आप सभी को पता होगा कि करीब एक माह पहले एक नर्सिंग होम संचालक के इशारे पर डा शिल्पी को निदेशक द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन पर आरोप लगे थे कि वे सीएचसी आने वाले मरीज़ों को बाहरी अस्पताल बुलाकर इलाज करती है। हालांकि इसकी आज तक कोई लिखित या मौखिक शिकायत किसी मरीज द्वारा कभी नही की गईं फिर भी जब नोटिस जारी हुआ तो डॉ शिल्पी ने 17 पन्नो का जवाब लिखकर निदेशक को भेज दिया था। मामला शांत हो गया था। लेकिन करीब एक माह बाद फिर से डॉक्टर के खिलाफ साजिश रची जाने लगी है।
जांच टीम ने किया खिलवाड़
एक रोज़ पहले जिले से एसीएमओ की अगुवाई में पलिया सरकारी अस्पताल पहुंची टीम ने जांच के नाम पर खिलवाड़ कर दिया। अस्पताल के बाकी सभी मामलों को छोड़ टीम ने सीधे गायनो डॉ शिल्पी को टारगेट किया। जब जांच में कोई ऐसा तथ्य सामने नही आया जो डॉ के ख़िलाफ़ हो तो स्टाफ नर्स और वार्ड में भर्ती मरीजों से पूछताछ की गई। यहां भी किसी ने मरीज ने जब नकारात्मक बात नही की तब टीम के सदस्यों ने गायनो वार्ड की महिला कर्मचारियों से लिखित सवाल पेशकर उनसे हाँ या न में जवाब देने को कहा। यहां से भी कोई ऐसी बात सामने नही आई तो हड़बड़ाई टीम ने डॉ शिल्पी पर दबाव बनाया और कहा कि वे एक कागज पर लिख के दे दें कि उन्हें अपने ऊपर लगे आरोपो के बारे में कुछ नही कहना। ऐसा करने से डॉ शिल्पी द्वारा इनकार कर दिया ग्या। उधर जब यह मामला उठा था तब सीएचसी अधीक्षक ने स्पष्ट रुप से कहा था कि उनके पास डॉ शिल्पी के खिलाफ आज तक किसी भी मरीज ने कोई शिकायत नहीं की है। टीम ने अधीक्षक से कुछ देर वार्ता की और उसके बाद वापस चली गई। इस निरीक्षण की कोई खबर मीडिया को नही लगने दी गई।
खड़े हो रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एनआरएचएम निदेशक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का डॉक्टर द्वारा जवाब दिया जा जा चुका था इसके बाद फिर से क्यों जांच शुरू हुई। दूसरा सवाल ये की अगर अगर उनके जवाब से निदेशक सन्तुष्ट नही थे तो दोबारा कोई नोटिस क्यों जारी नही किया गया। ये कुछ सवाल हैं जो साफ तौर पर बताते हैं कि डा शिल्पी को यहां से हटाने के किये सम्बन्धित किसी भी हद तक जा सकते हैं। अपनी पहुँच और सत्ता पक्ष के दबाव के बल पर वे केवल एक डॉक्टर को यहां से नही हटाना चाहते बल्कि पलिया की जनता खासकर महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करने का भी उनका पूरा प्रयास है।
जसवन्त कुमार वर्मा, निघासन खीरी, इडिया नाउ 24