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किसानों ने मोदी की रैली के बहिष्कार का लिया फैसला

किसानों ने मोदी की रैली के बहिष्कार का लिया फैसला

मांगों को लेकर फर्रुखनगर  के तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा

परियोजना को काले झंडे दिखा नारेबाजी सहित रोष प्रकट किया 

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरूग्राम ।  किसानों ने मोदी की रैली के बहिष्कार का  फैसला किया है। पीएम की रैली वाले इलाके के साथ ही आसपास के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर फर्रुखनगर  के तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा है। राई, खरखोदा, बादली के बाद फर्रुखनगर में पटौदी के किसानों ने टोल प्लाजा पर किसानों ने प्रधानमंत्री द्वारा केएमपी उद्घाटन परियोजना को काले झंडे दिखा कर नारेबाजी के साथ बहिष्कार किया। 

राई, खरखोदा, बादली के किसानों के विरोध के बाद अखिल हरियाणा न्यूनतम समर्थन मूल्य सम्यक समिति प्रदेश अध्यक्ष किसान नेता प्रदीप धनखड़ , भूमि बचाओ संघर्ष समिति प्रदेश अध्यक्ष हंसराज राणा, भारतीय किसान यूनियन लक्ष्मण सिंह गणवी राठी, डा. शमशेर सिंह,धर्मपाल जय किसान आंदोलन के जगदीश नंबरदार दहिया, हरि सिंह चौहान व अनेक  किसान संगठन प्रतिनिधियों ने तहसीलदार फर्रुखनगर की मार्फत मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार, राज्यपाल हरियाणा सरकार, नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन के माध्यम से किसानों की आपत्तियों से लिखित रूप में सरकार को अवगत कराया है।
 
लैंड पूलिंग का विरोध करते गरजे किसान 
ज्ञापन के अनुसार सरकार द्वारा घोषित केएमपी के साथ लगती जमीन में 6 लाख एकड़ प्रस्तावित पंचनगर विकास के लिए लैंड पूलिंग का खुलकर विरोध करते हुए किसान गरजे।  पूर्वोत्तर सरकार के अधिग्रहण समय से ही माननीय हाईकोर्ट हरियाणा ने हुड्डा सरकार की लैंड पूलिंग को सिरे से खारिज कर दिया था, और लैंड पूलिंग को किसान विरोधी करार देकर अप्रासंगिक घोषित किया था। लैंड पुलिंग को किसानों के साथ बड़ा धोखा घोषित करते हुए किसानों ने केजीपी की तर्ज पर 4 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा बढ़ोतरी राशि भी किसानों को जारी नहीं की है, न ही किसानों को एक्सप्रेस मार्ग के रॉयल्टी के साथ पुर्नस्थापना और पुनर्वास लाभ ही मिल पाए हैं।  केएमपी का नाम दादा छोटूराम के नाम पर किसानों ने सरकार को उन का वायदा याद दिलाया, केएमपी के साथ लगती जमीन पर तमाम पाबंदिया खत्म कर किसान को अपनी जमीन पर व्यवसायिक गतिविधियां विकसित करने के लिए वित्तीय प्रबंधन  एमएसएमई फंड के तहत वित्तीय सहायता और नियमों में छूट की मांग, कंट्रोल एरिया खत्म किया जाए साथ लगते गांव में टोल फ्री सुविधा दी जाए। सरकार बिल्छरस की दलाली छोडक़र किसानों को उद्योगपतियों की तरह आर्थिक रूप से संपन्न होने के लिए उनके जमीन के इस्तेमाल के लिए वैधानिक बाधाएं खत्म करने जैसी अनेक आपत्तियां दर्ज की गई।
 
उद्घाटन पर किसानों के घरों में चूलहा नहीं जलेगा
किसानों ने कैबिनेट मंत्री का किसी भी टोल नाके पर आगमन पर काले झंडों से जमीनी स्तर पर विरोध करने की मंशा से अवगत कराया है। किसानों का आरोप है कि बढ़ा हुआ मुआवजा तो देना दूर की बात सरकार ने पटौदी-गुरुग्राम क्षेत्र के किसानों से मुआवजा वापसी का अभियान छेड़ रखा है। जिसमें पातली हाजीपुर , महमूदपुर, सुल्तानपुर, जंगलवाला, मुबारकपुर आदि दर्जनों गांव प्रभावित हैं।  उद्घाटन वाले दिन 3 जिलों के किसानों के घरों में चूल्हे नहीं जलाने के किसानों ने फैसले लिए हैं।  किसान नेता प्रदीप धनखड़ ने पूर्वोत्तर सरकार द्वारा डिफाल्टर ठेकेदार पर घोषित 2500 करोड़ रुपए जुर्माना राशि  रिकवरी नहीं करने का सरकार से हिसाब किताब मांगा है । जिसे कि केएमपी के निर्माण में इतनी बड़ी रकम को पार्टी फंड में रफा-दफा कर जनता के खजाने पर लूट करार दिया है । जिसकी जांच होनी चाहिये, नेता प्रतिपक्ष से आवाज उठाने की मांग रखी।
किसान मोदी की रैली से दूरी रखेंगे
किसानों ने कहा कि सरकार चाहे तो पूरे केएमपी के साथ लगते जिलों में धारा 144 लगा दे ,लेकिन किसान मोदी की प्रस्तावित रैली से न केवल दूरी बनाकर रखेंगे, बल्कि एक्सप्रेस-वे पर खड़े होकर अपना शांतिपूर्वक विरोध पूरे राष्ट्र के किसानों के समक्ष रखेंगे। सरकार प्रदेश में प्रति वर्ष 254 आत्महत्या पर मौन है और लगातार किसानों को आर्थिक गुलामी की तरफ धकेल रही है।  जिसका जवाब 2019 के चुनाव में राजनीतिक बहिष्कार के रूप में भाजपा को देखने को मिलेगा।  किसान उद्घाटन के दिन रैली स्थल पर मोदी वापस जाओ नारों के साथ काले झंडे से भाजपा की कृषि विरोधी नीतियों का विरोध प्रकट करेंगे।