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कर्म की महानता को प्रकट करता है महर्षि वाल्मीकि का कृतित्व : जीएल शर्मा

कर्म की महानता को प्रकट करता है महर्षि वाल्मीकि का कृतित्व : जीएल शर्मा

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

 गुरुग्राम। भारतीय सनातन धर्म व्यवस्था को लोक समाज का अंग बनाने वाले महर्षि वाल्मीकि प्रकाट्य दिवस पर उन्हें याद करते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता व हरियाणा डेयरी प्रसंघ के चेयरमैन जीएल शर्मा ने कहा कि वे सामाजिक एकता के प्रथम सूत्र थे, जिन्होंने धार्मिकता को लोक आचरण में बदल दिया। महर्षि वाल्मीकि का कृतित्व समाज को सीखने के लिए प्रेरित करता है।

इस मौके पर जीएल शर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि सनातनी संत परंपरा में महर्षि वाल्मीकि उच्चकोटि के तपस्वी व महाकवि थे। हालांकि, उनका शुरुआती जीवन डाकू के रूप में बीता था। परंतु, जब उन्हें ज्ञान हुआ कि परिवार के भरण-पोषण के लिए जो अनाचार वे कर रहे हैं, उसके पापों में तो भागीदार बनने तक को उनका परिवार राजी नहीं है। तब उन्हें प्रायश्चित हुआ और वे अनाचार का मार्ग छोड़कर तप के मार्ग पर आगे बढ़े। कठिन तपस्या व साधना से उन्होंने महर्षि पद धारण किया। उनके द्वारा रचित वाल्मीकि रामायण ने लोक जीवन व आस्था को मर्यादा, सत्य, प्रेम, भातृत्व, मित्रत्व और सेवक धर्म की सीमा में बांध दिया और आजतक भारतीय समाज उसी अनुरूप जीता चला आ रहा है।

इस मौके पर जीएल शर्मा ने खासकर युवा वर्ग का आह्वान किया कि वे महर्षि वाल्मीकि के जीवन से सीखें कि व्यक्ति का कर्म ही उनकी महानता को निर्धारित करता है, सभी पैदा एक समान ही होते हैं। उन्होंने वाल्मीकि प्रकाट्य दिवस पर अपनी ओर से बधाई व शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।