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ग्राम प्रतिनिधि व जनता प्रतिनिधि को एक मनरेगा के मजदूर से भी बत्तर समझती हैं सरकारे

रिपोर्ट फतेहपुर

रिपोर्टर विवेक मिश्रा

ग्राम प्रतिनिधि व जनता प्रतिनिधि को एक मनरेगा के मजदूर से भी बत्तर समझती हैं सरकारे

सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का किया जा रहा शोषण आगामी 2019 के लोक सभा चुनाव में बन सकता है भाजपा के हार का कारण। जबकि ग्राम प्रधान भी सांसदों एवं विधायकों की तरह ही जनता द्वारा चुना हुआ जन प्रतिनिधि होता है। फिर भी शासन और प्रशासन द्वारा ग्राम प्रधानों को नौकर से भी बद्तर समझा जा रहा है। जबकि ग्राम प्रधान देश और समाज की रीढ़ की हड्डी है। एक तरफ सांसदों विधायकों द्वारा अपना अपना वेतन स्वयं बढ़ा लिया जाता है। उसका पक्ष विपक्ष कोई भी विरोध नहीं करता है। तो दूसरी तरफ ग्राम प्रधानों को 3500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। जो लगभग 116 रुपये दिन के हिसाब से पड़ता है। जबकि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को 175 रुपये मिलते हैं। जनता द्वारा प्रधान की कीमत मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों से कम। जबकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बनने वाले शौचालयों के निर्माण हेतु 12000 रुपये शासन द्वारा मिलने की ब्यवस्था है। वह भी जब शौचालयों का निर्माण पूरा हो जाएगा उसके पहले सारा सामान लेवरों की मजदूरी ग्राम प्रधान अपनी जेब से खर्च करे। और उसके बाद ग्राम प्रधानों के खिलाफ 12 जाचे मनरेगा में काम कराने के लिए ग्राम प्रधानों पर दबाव काम न कराने पर कार्यवाही की धमकी काम कराने के बाद लेवरों के खातों में सालो पैसा नहीं आता है मजदूर ग्राम प्रधानों के चक्कर काटते घूमते हैं। आये दिन ग्राम प्रधानों पर नौकरों की तरह शासन प्रशासन की तरफ से दबाव बनाया जाता है। कुल मिलाकर ग्राम प्रधानों को बेईमान साबित करने की कोशिश होती रहती है। जबकि ग्राम प्रधान का पद एक सम्मानित पद है।जहाँ पिछली सरकार में ग्राम प्रधानों को बड़ा सम्मान मिलता था। तो वहीं वर्तमान सरकार में ग्राम प्रधानों को नौकरों से भी गिरा समझना बहुत ही बड़ी भूल है। जो आने वाले समय में सत्ता पक्ष के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। एक तरफ ग्राम प्रधान को देश और समाज की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। तो वहीं दूसरी तरफ उसका शोषण करना हास्यास्पद बना हुआ है। ग्राम प्रधानों के पास भी गांवों में वोट बैंक होता है। वह किसी भी चुनाव में हार को जीत में बदल सकता है इसमें जरा भी सन्देह नहीं है। अभी भी समय सुधार करने के लिए है। नही तो पछिताना पड़ेगा ।