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मां बनने में बाधक हो सकती है डायबिटीज, रहें सावधान

मां बनने में बाधक हो सकती है डायबिटीज, रहें सावधान

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम। महिलाओं को अक्सर संतान को जन्म न देने का दंश अधिक सहना पड़ता है। आज गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अधिक आसान है और लोगों में जागरूक भी बढ़ी है। इसके सही कारणों का पता लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण नहीं रहा है। इनमें से ही एक प्रमुख कारण है डायबिटीज के कारण होने वाला पुरुष बांझपन है। अगर महिला डायबिटीज से पीडि़त है तब मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिये कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके कारण गर्भपात हो सकता है। यह बात गुरुग्राम स्थित इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल की गाइनोकोलॉजिस्ट एवं आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. निधि सलूजा ने गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज को लेकर कही।

उन्होंने कहा कि अगर जन्म लेने वाले बच्चे का आकार सामान्य से बड़ा है तो सी-सेक्शन आवश्यक हो जाता है। इसके अलावा बच्चे के लिये जन्मजात विकृतियों की आशंका बढ़ जाती है। मां और बच्चे दोनों के लिये संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। उनका कहना है कि यदि महिला डायबिटीज से पीडि़त है तो उस स्थिति में गर्भस्थ शिशु और मां दोनों के लिए खतरे की बात होती है। ऐसे में गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है। यदि गर्भ में बच्चा पूर्ण विकसित हो जाता है तो प्रसव के दौरान बच्चों का आकार सामान्य से बड़ा होने की स्थिति में सर्जरी ही डिलीवरी का एकमात्र विकल्प होता है। बच्चे में जन्मगत विकृतियां हो सकती हैं और मां व बच्चे को संक्रमण होने का खतरा भी रहता है। डॉ. निधि सलूजा का कहना है कि अपने देश में यह बीमारी खानपान, जेनेटिक और हमारे इंटरनल ऑर्गन्स में फैट की वजह से होती है। गर्भवती महिलाओं को ग्लूकोज पिलाने के दो घंटे बाद ओजीटीटी (ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट) किया जाता है, ताकि जेस्टेशनल डायबिटीज का पता चल सके। यह जांच अक्सर गर्भावस्था के 24 से 28 हफ्तों के बीच होती है, दो हफ्ते बाद पुन: शुगर की जांच की जाती है। इस दौरान 10 फीसदी अन्य महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज ठीक नहीं हुई थी। इन महिलाओं को इंसुलिन देकर बीमारी कंट्रोल कर ली जाती है। ऐसा कर मां के साथ ही उनके शिशु को भी इस बीमारी के खतरे से बचाया जा सकता है।