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हर गांव को जल्द मिलेगा नल से शुद्ध जल, स्वतंत्र देव ने कहा- अंतिम चरण में 40,000 योजनाओं का निर्माण कार्य

हर गांव को जल्द मिलेगा नल से शुद्ध जल, स्वतंत्र देव ने कहा- अंतिम चरण में 40,000 योजनाओं का निर्माण कार्य

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल्द प्रदेश के हर गांव को नल से शुद्ध पीने का पानी मिलने लग जाएगा। इसके लिए 40,000 योजनाओं का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

उत्तर प्रदेश के हर गांव को जल्द नल से शुद्ध पेय जल मिलेगा। इसके लिए 40, 000 योजनाओं का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। यह जानकारी जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव ने दी। मंगलवार (27 जनवरी) को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन एवं रखरखाव पर मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद किय गय, जिसमें यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश में 40 हजार से अधिक योजनाओं को निर्माण कराया जा रहा है, जो लगभग पूर्ण होने की ओर अग्रसर है।उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के पूरा होते ही गांवों को नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। मंत्री सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड एवं विन्ध्य क्षेत्र के अधिकांश गांवों में जल जीवन मिशन का कार्य पूर्ण करते हुए ग्रामीण परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके कारण क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है। नई दिल्ली में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में सभी राज्यों के जलशक्ति मंत्री मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि 15 अगस्त 2019 तक उत्तर प्रदेश में केवल 5 लाख 16 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल उपलब्ध कराया गया था, जो प्रदेश के कुल ग्रामीण परिवारों का मात्र 1.93 प्रतिशत था। आज प्रदेश के 85 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

10 साल तक योजनाओं का संचालन एवं मॉनिटरिंग कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन से पूर्व में निर्मित ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने के बाद योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण ग्राम पंचायतों द्वारा ही किया जा रहा था। ऐसे में ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन एवं तकनीकी दक्षता न होने के कारण योजनाओं पर विद्युत बिल का भुगतान नही होने और रखरखाव नही होने के कारण अधिकांश योजनायें बंज हो जाती थी। इस समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया कि निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों से 10 वर्षों तक संचालन एवं अनुरक्षण भी कराया जाए, जिससे कि योजना के निर्माण की गुणवत्ता इत्यादि के संबंध में उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जा सके।

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आगे कहा कि प्रदेश में अधिकांश योजनाएं सौर ऊर्जा आधारित बनाई गई है, जिससे योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण की लागत में करीब 50 प्रतिशत की कमी आएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की 80 प्रतिशत से अधिक योजनाएं सौर ऊर्जा पर आधारित हैं। इसके अलावा पेयजल की गुणवत्ता राज्य सरकार द्वारा लैब में कराई जा रही है। साथ ही साथ ग्रामीण स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करने के लिए हर गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है।

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