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स्वामी सहजानंद सरस्वती के पैतृक गांव देवा में भव्य कार्यक्रम, शंकराचार्य अनंतानंद सरस्वती ने किया पूजन-अर्चन

ब्यूरो रिपोर्ट गाज़ीपुर।

स्वामी सहजानंद सरस्वती के पैतृक गांव देवा में भव्य कार्यक्रम, शंकराचार्य अनंतानंद सरस्वती ने किया पूजन-अर्चन

दुल्लहपुर (गाजीपुर)। किसानों के मसीहा कहे जाने वाले स्वामी सहजानंद सरस्वती के पैतृक गांव दुल्लहपुर के देवा में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम वाराणसी राजगुरु मठ के शंकराचार्य अन्नतानंद सरस्वती की उपस्थिति में संपन्न हुआ।इस अवसर पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपक चौरसिया ने शंकराचार्य सहित सभी आगंतुक अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन से हुई। शंकराचार्य अनंतानंद सरस्वती ने विधिवत पूजा कर श्रद्धांजलि अर्पित की।सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किसानों के अधिकारों के लिए बिगुल फूंका और देशभर में किसानों को संगठित किया। उनका प्रभाव देश के कोने-कोने में किसानों और समाज के हर वर्ग पर पड़ा। ऐसे महापुरुषों की स्मृति को जीवित रखना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और त्याग से प्रेरणा ले सकें।उन्होंने कहा कि आज से सौ-सवा सौ वर्ष पूर्व स्वामी जी ने अंग्रेजों के विरुद्ध किसानों के हित में जो आंदोलन किया, वह इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। स्वामी सहजानंद सरस्वती का कथन था कि “जो अन्न उपजाएगा वही भगवान कहलाएगा,” इसी कारण उन्हें किसानों का मसीहा कहा जाता है।कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि आगामी 26 जून को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर देवा गांव में भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।इस मौके पर अरविंद राय, अमरचंद पांडे, अनंत पांडे, रमेश पांडे, नींबू यादव, मखंचू जायसवाल, संजीव चौरसिया, उदय यादव, बालेश्वर राय, रवि राय, शारदा राय, नीरज राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा।

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