Breaking Newsभारत

सैंथवार मल्ल महासभा का BJP को अल्टीमेटम: ‘उपेक्षा बंद करो वरना 2027 में समर्थन पर करेंगे पुनर्विचार’, गोरखपुर-पूर्वांचल में बढ़ी सियासी हलचल

सैंथवार मल्ल महासभा का BJP को अल्टीमेटम: ‘उपेक्षा बंद करो वरना 2027 में समर्थन पर करेंगे पुनर्विचार’, गोरखपुर-पूर्वांचल में बढ़ी सियासी हलचल!

गोरखपुर/पूर्वांचल: सैंथवार मल्ल महासभा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। महासभा का कहना है कि दशकों से भाजपा के प्रति वफादार रहने के बावजूद इस समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो समाज अपने समर्थन पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होगा।

​संगठन की मुख्य नाराजगी:

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में बड़ी आबादी होने के बावजूद भाजपा ने हालिया नियुक्तियों में इस समाज को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि गोरखपुर में भाजपा के जिला अध्यक्ष पद या कार्यकारिणी में समाज के किसी व्यक्ति को सम्मानजनक स्थान नहीं दिया गया। यहाँ तक कि नगर निगम में 10 पार्षदों के मनोनयन में भी सैंथवार समाज की अनदेखी की गई।

​प्रशासनिक न्याय न मिलने का आरोप:

महासभा ने न केवल राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा का भी मुद्दा उठाया है। विज्ञप्ति में देवरिया के शिक्षक स्व. कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या और कुशीनगर में एक युवक की हत्या जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इन घटनाओं में समाज को उचित न्याय या सहायता नहीं मिली। इसके अलावा, कप्तान अमन सिंह और शहीद सब-इंस्पेक्टर को भी सरकार द्वारा उचित सम्मान न दिए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया गया है।

​साजिश का आरोप:

संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्वांचल के जिलों में सोची-समझी रणनीति के तहत समाज की जनसंख्या को कम करके दिखाया जा रहा है, ताकि टिकट बंटवारे और संगठन में उनकी हिस्सेदारी को खत्म किया जा सके।

​भविष्य की चेतावनी:

सैंथवार मल्ल महासभा के पदाधिकारियों, बुद्धजीवियों और समाजसेवियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि समाज के भीतर अब काफी आक्रोश है। यदि भाजपा ने समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और संगठन व आगामी चुनावों में उचित भागीदारी नहीं दी, तो समाज भविष्य में कड़ा राजनीतिक फैसला ले सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button