
बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाजीपुर।
आज दिनांक।10/12/025को
सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने राज्य स्तर के प्रशासनिक पदों के नाम बदलने की उठाई मांग, कहा—‘पदनाम सेवा भाव को दर्शाएँ’

गाजीपुर।संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार को गाजीपुर की सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने राज्यसभा में महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य स्तरीय कार्यालयों और अधिकारियों के पदनामों को बदलकर उन्हें जनसेवा केंद्रित बनाया जाना चाहिए। इससे प्रशासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम होगी तथा शासन की मूल भावना — “जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता के साथ” — स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगी।इससे पूर्व भी डॉ. बलवंत खतरनाक बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज हेतु आवश्यक दवाओं और थेरेपी को न्यूनतम व सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की मांग उठा चुकी हैं, ताकि गरीब परिवारों को राहत मिल सके।उन्होंने सदन में कहा कि भारत अभी भी अपने प्रशासनिक ढांचे में शाही और सामंतवादी मानसिकता के अवशेषों से जूझ रहा है। औपनिवेशिक काल से चली आ रही अधिकार-केंद्रित व्यवस्था आज भी कई कार्यालयों के कामकाज और नागरिकों के साथ उनके व्यवहार को प्रभावित करती है। इससे पारदर्शिता, जनभागीदारी और समयबद्ध सेवाओं में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।सांसद ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’, राजपथ का ‘कर्तव्य पथ’, राजभवन का ‘लोक भवन’ और केंद्रीय सचिवालय का ‘कर्तव्य भवन’ रखा गया है, जो एक नागरिक-केंद्रित और जनसेवामूलक दृष्टिकोण को दर्शाता है।इसी क्रम में उन्होंने मांग की कि राज्य स्तरीय सभी पदों—जैसे जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और विभागीय प्रमुखों—के पदनामों को भी बदला जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि ‘जिलाधिकारी’ जैसे पद का नाम ‘जिला सेवक’ या ऐसा कोई नाम रखा जाए जो पद के वास्तविक उद्देश्य—जनसेवा—को अभिव्यक्त करे। इससे अधिकारियों में विनम्रता, जवाबदेही और नागरिकों के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।उक्त जानकारी देते हुए प्रमोद वर्मा ने कहा कि डॉ. संगीता बलवंत लगातार गाजीपुर के विकास और गरीब-आमजन के हितों की आवाज संसद में उठाती रही हैं। उनका प्रयास रहता है कि जिले को अधिक से अधिक सरकारी सुविधाएँ मिलें और गाजीपुर मुख्यधारा के विकास से जुड़ सके।



