Breaking Newsभारत

समाजसेवी लोग समाज से प्रशंसा भी लेना चाहते वह भी कुछ किये बिना…!!

समाजसेवी लोग समाज से प्रशंसा भी लेना चाहते वह भी कुछ किये बिना…!!

ठंड का बड़ रहा प्रकोप,क्या कागजो तक हो सीमित रहेगा..?

जब हम हकीकत से रूबरू होते,तो मालूम पड़ता कि मौसम की मार के कारण जा रही जानों के पीछे मौसम से अधिक सिस्टम की खस्ता हालत, जिम्मेदार..?

शहरो की सड़कों पर सिमटकर सोते लोग इस व्यवस्था का असली चेहरा हैं..!

प्रकृति की अपनी अपनी गति होती है और अगर यह अपनी सामान्य अवस्था में है तो धरती पर जीवन स्थितियां मजबूत होती हैं। लेकिन अगर किन्हीं वजहों से इसका चक्र बाधित होता है तो यही प्रकृति बड़े नुकसान का भी वाहक बनती है। पिछले कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन के मसले पर समूची दुनिया में चिंता जाहिर की जा रही है।अब ठंड का प्रकोप इस तरह बढ़ गया की लोग कांपने लगे है। वहीं ठंड से लोगों का दिनचर्या बदल रही है ओर मौसम बेहद सर्द हो चुका है। लोग दिन भर कांपने को विवश नजर आ रहे है।ठंड की वजह से जनजीवन का बुरा हाल है वे गरीबों तक अभी तक सरकारी सहायता नहीं पहुंची है!ठंढ़ के कारण गरीबों का सबसे बुरा हाल है,इन्हें प्रशासन द्वारा अलाव की भी व्यवस्था नहीं की जा रही है,वही कंबल की भी व्यवस्था नहीं की जा रही है,इस कारण गरीब काफी परेशान हैं।ठंढ़ से बचना उनके लिए मुश्किल हो रहा है मजदूरी कर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वाले मजदूरों के लिए तो जैसे यह ठंड कहर बरसा रही है।मजदूर ठंड की वजह से काम पर निकल भी नहीं पा रहे हैं तो वही नगरो सहित जिलो में कई स्वयंसेवी एवं स्वैच्छिक संगठन है,ऐसे संगठनों द्वारा समाज हित में काम करने का दावा किया जाता है,ऐसे लोग समाज से प्रशंसा भी लेना चाहते हैं, जबकि धरातल पर ऐसे संगठन समाज हित के लिए आगे नहीं आते हैं,इस ठंढ़ में गरीबों की सहायता के लिए इनका कहीं भी दर्शन नहीं हो रहा है,वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मामले को लेकर सक्रियता नहीं दिखाई गई है!इसके परिणाम स्वरूप लोग ठंड से कांपने को विवश नजर आ रहे हैं!फिर जब हम दिसंबर के महीने में प्रवेश करते हैं, तो ठंड के प्रकोप के कारण न जाने कितने ही गरीब तबकों से मौत की खबरें आए दिन सुनने को मिलती रहती हैं। इसे जब हम उन गरीब लोगों के निजी नजरिए से देखते हैं तो सिस्टम की दुर्दशा का अंदाजा नहीं लग पाता।लेकिन ये नजर अंदाज करने वाली बात नहीं है!

ये भी जग जाहिर है कि कई प्रकार के लुभावने विज्ञापनों-पोस्टरों के जरिए जनप्रतिनिधि अपना नाम चमकाने में लगे रहते हैं! जिससे निचले तबकों के अपने वोटबैंक को मजबूत किया जा सके।वहीं जब आप असल हालात का मुआयना करते हैं, उसकी हकीकत से रूबरू होते हैं तो मालूम पड़ता है कि मौसम की मार के कारण जा रही जानों के पीछे मौसम से अधिक सिस्टम की खस्ता हालत जिम्मेदार है! जर्जर हालत में गतिमान दीमक लगी घूसखोरी की व्यवस्था जिम्मेदार है!गरीबों की जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ एक कंबल,एक अलाव और एक रैन बसेरा वे सड़को पर अलाव की बस दूरी है,लेकिन प्रशासन की कमजोरी इस दूरी को और लंबा कर रही है,सरकारी फाइलें चाहे कितनी ही सुविधाओं का जिक्र करें, पर शहर की सड़कों पर सिमटकर सोते लोग इस व्यवस्था का असली चेहरा हैं! जब तक – रैन बसेरों में वास्तविक सुविधाएं, अलाव की नियमित व्यवस्था, कंबलों का वितरण और जनता तक सही जानकारी नहीं पहुंचेगी, तब तक गरीबों की रातें काली और ठिठुरती ठंड से भरी रहेंगी!

Balram Singh
India Now24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button