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लखनऊ : लखनऊ सीएचसी का हाल : एक रुपये के परचे पर 200 रुपये की दवा

लखनऊ सीएचसी का हाल : एक रुपये के परचे पर 200 रुपये की दवा

लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की सख्त हिदायत के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखी जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की आस लेकर आने वाले मरीजों को डॉक्टर धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। आलम यह है कि सीएमओ स्तर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण गरीब मरीज इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हैं।बीते माह उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सरकारी अस्पतालों में किसी भी स्थिति में बाहर की दवाएं न लिखी जाएं। यदि बहुत आवश्यक हो, तो केवल जन औषधि केंद्रों की सस्ती जेनेरिक दवाएं ही सुझाई जाएं। उन्होंने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ निलंबन तक की चेतावनी दी थी, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सरकारी दावों के उलट सीएचसी पर दवाओं का यह ””बाहरी खेल”” गरीब जनता की कमर तोड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी उन्हें मुफ्त दवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सीएचसी अलीगंज : आयरन सिरप भी बाहर सेशुक्रवार को अलीगंज सीएचसी में सरकारी सप्लाई होने के बावजूद पंजीकरण संख्या 20250024242 पर आयरन सप्लीमेंट का सिरप बाहर का लिखा गया। वहीं, एक प्रसूता के तीमारदार ने वीडियो वायरल कर आरोप लगाया कि सिजेरियन प्रसव के बाद छुट्टी देते समय डॉक्टर ने 1300 रुपये की बाहर की दवाएं लिख दीं।

सीएचसी माल : एक रुपये का परचा, जेब पर भारी खर्चामाल सीएचसी में पंजीकरण संख्या 14085 के मरीज रमेश को दो घंटे के इंतजार के बाद डॉक्टर ने बाहर की दवाएं लिख दीं। मेडिकल स्टोर पर इन दवाओं की कीमत 200 रुपये बताई गई, लेकिन पैसे कम होने के कारण रमेश आधी दवा ही खरीद सके। इसी प्रकार, पंजीकरण संख्या 12835 के मरीज राजेंद्र ने भी आरोप लगाया कि उनसे 220 रुपये की दवा बाहर से मंगवाई गई।Iबाहर से दवा लिखने पर रोक है। इसके बाद भी अगर कोई चिकित्सक बाहर की दवा लिख रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।II- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI

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