रिंकू सिंह के पिता का निधन: घर-घर ढोए सिलेंडर, कामयाबी के बाद भी न रुके, बेटे की सफलता के पीछे पिता का संघर्ष

रिंकू सिंह के पिता का निधन: घर-घर ढोए सिलेंडर, कामयाबी के बाद भी न रुके, बेटे की सफलता के पीछे पिता का संघर्ष
रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह को गंभीर हालत में करीब तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने आए थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले दोबारा टीम के साथ जुड़ गए थे।
भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में देर रात अंतिम सांस ली। करीब तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थे। रिंकू सिंह की कामयाबी के पीछे उनके पिता का भी संघर्ष शामिल है।
आईपीएल में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से अलीगढ़ के रिंकू सिंह ने जैसे ही एक के बाद एक जीत के पांच छक्के लगाए, तो रिंकू सिंह हर जगह छा गए। इसके बाद रिंकू के एक के बाद एक सपने सच होते चले गए। इस सफलता में रिंकू सिंह के पिता की जी तोड़ मेहनत शामिल है। क्रिकेटर रिंकू सिंह का जन्म अलीगढ़ के गोविला गैस एजेंसी पर काम करने वाले खानचंद सिंह के यहां हुआ।
रिंकू सिंह के पिता गैस गजेंसी में हॉकर का काम करते थे। रिंकू पांच भाई- एक बहन में तीसरे नंबर के हैं। रिंकू के पिता खानचंद ने गैस एजेंसी के दिए हुए दो कमरों के मकान में अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर गुजर बसर किया। रिंकू को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। पिता खानचंद पूरे दिन कंधों पर सिलिंडर ढोकर जो कमाते थे, उसमें से ही रिंकू के लिए गेंद, बल्ला आदि सामान लाकर देते थे।
कोच मसूद जफर अमीनी ने बताया कि पिता, रिंकू सिंह के क्रिकेट में शौक को देखते हुए अलीगढ़ के अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम में लेकर आए। जहां तैयारी करते हुए रिंकू सिंह ने अंडर 16 खेला। डीपीएस के वर्ल्ड कप में रिंकू को बतौर आमंत्रित खिलाड़ी खिलाया गया, जहां रिंकू ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए मैन ऑफ द सीरिज हासिल की। इसके बाद रिंकू अंडर 19 यूपी खेला, फिर रणजी और फिर आईपीएल में अपना जलवा दिखाया।
पिता ने नहीं आना दिया रिंकू पर जिम्मेदारी का बोझरिंकू सिंह के जन्म से कामयाब होने के बाद तक उनके पिता खानचंद कंधों पर सिलिंडर ढोते रहे, पर रिंकू हमेशा क्रिकेट में रहे। रिंकू को कभी भी पिता ने सिलिंडर ढोने की नौबत नहीं आने दी।



