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राजमाता सुमित्रा देवी की पुण्यतिथि पर डॉ. सन्तोष कुमार मिश्रा ने 556 गरीबों को कंबल वितरित किए, ब्लड डोनेशन से मानवता की मिसाल पेश

शिव प्रकाश पाण्डेय मंडल ब्यूरो की रिपोर्ट।

आज दिनांक।03/01/026को

राजमाता सुमित्रा देवी की पुण्यतिथि पर डॉ. सन्तोष कुमार मिश्रा ने 556 गरीबों को कंबल वितरित किए, ब्लड डोनेशन से मानवता की मिसाल पेश


बिंद्रा बाजार, ठेकमा ब्लॉक (बालपुर ख़रैला, गाजीपुर): राजमाता सुमित्रा देवी की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार, 2 जनवरी को एम एस डी पॉलिटेक्निक कैंपस में सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदनाओं का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और आयोजक एम एस डी ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन राजा साहेब डॉ. सन्तोष कुमार मिश्रा रहे।
उन्होंने इस अवसर पर 556 गरीब महिला एवं पुरुषों को कंबल वितरित किए और ब्लड कैंप में दर्जनों लोगों ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम की शुरुआत राजमाता सुमित्रा देवी और महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्वलित करके श्रद्धासुमन अर्पित करने से हुई। इसके बाद पूरा कैंपस “राजमाता सुमित्रा देवी और महराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा अमर रहें” के उद्घोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर हजारों ग्रामीणों ने भाग लिया और कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता अवधेश शर्मा ने कुशलतापूर्वक किया। वक्ताओं में अरुण पाठक, अर्जुन राय, डॉ. राजेश उपाध्याय, राकेश तिवारी व्यास, रविन्द्र कुमार मिश्रा, चंद्रजीत राजभर, अभिषेक उपाध्याय, विंध्यवासिनी तिवारी और रविकांत तिवारी शामिल हुए। उन्होंने समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
राजा साहेब डॉ. सन्तोष कुमार मिश्रा ने अपने माता-पिता के जीवन और उनके शिक्षाप्रद व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी माता सदा निष्पक्ष और साहसी थीं, चाहे परिवार में विवाद हो या समाज में किसी प्रकार की समस्या। उन्होंने बताया कि 2010 में उनकी माता के नाम पर एम एस डी पॉलिटेक्निक कॉलेज, एम एस डी आदर्श होम्योपैथी कॉलेज और मां विंध्यवासिनी सुमित्रा देवी एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना की गई, जबकि उनके पिता के नाम पर पंडित त्रिपुरारी मिश्रा महाविद्यालय और पंडित त्रिपुरारी मिश्रा फार्मेसी कॉलेज की स्थापना हुई, जो आज भी समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उन्होंने आगे बताया कि उनके पूर्वज भी समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पित थे। उनके बाबा रामनाथ जी ब्रिटिश काल में हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और उर्दू के विद्वान थे और रेलवे विभाग में सेवा प्रदान की। उनके चार पुत्र सरकारी सेवा में थे, जिनमें महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा भी शामिल थे।
डॉ. सन्तोष कुमार मिश्रा ने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता का सम्मान और आदर करें, और उनकी स्मृति में बन रहे मूर्ति स्थल का निर्माण कार्य में सहयोग करें, जहां उनकी माता-पिता की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
कार्यक्रम का समापन कंबल और मिष्ठान वितरण के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने राजा साहेब के समाजसेवा के प्रयासों की सराहना की। इस कार्यक्रम ने न केवल गरीबों के जीवन में राहत दी बल्कि मानवता, सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया।

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