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फतेहपुर : कोर्रा कनक खदान में जल प्रवाह रोककर खुलेआम अवैध खनन, यमुना के बीच बनाया गया कच्चा रास्ता

कोर्रा कनक खदान में जल प्रवाह रोककर खुलेआम अवैध खनन, यमुना के बीच बनाया गया कच्चा रास्ता

मौके की तस्वीरों ने खोली पर्यावरणीय अपराध की परत, जिम्मेदार विभाग मौन

फतेहपुर जनपद के ललौली थाना क्षेत्र स्थित कोर्रा कनक खदान (खण्ड–2) में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। 23 दिसंबर 2025 को ली गई स्थल की तस्वीरें यह साफ दिखाती हैं कि खनन क्षेत्र में प्राकृतिक जल प्रवाह को रोककर भारी मशीनों से अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जल प्रवाह को अवरुद्ध कर यमुना नदी के बीच तक पहुंचने के लिए बबूल के पेड़ों को डलवाया गया है और उनके ऊपर बालू डालकर अस्थायी रास्ता बना लिया गया है। इस कच्चे रास्ते का इस्तेमाल भारी वाहनों और जेसीबी मशीनों द्वारा नदी के बीच खनन करने के लिए किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर NGT और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।
स्थल पर लगे बोर्ड के अनुसार यह खनन क्षेत्र “स्वदाचल खण्ड–2, कोर्रा कनक” के नाम से संचालित है, जिसकी प्रोपराइटर/संचालक फर्म प्रो. कनवर इंटरप्राइजेज प्रा. लि. बताई जा रही है। इसके बावजूद नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ कर, पेड़ों का सहारा लेकर रास्ता बनाना और यमुना के बीच खनन करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
मौके की तस्वीरों में जेसीबी मशीनें, रोका गया जल प्रवाह, बबूल के पेड़ों पर डाली गई बालू और मिट्टी के ऊंचे ढेर साफ दिखाई दे रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह नदी के बीच रास्ता बनाकर खनन करने से यमुना के प्रवाह में बाधा, भू-जल स्तर में गिरावट, नदी तटों का तेज कटाव और आसपास की कृषि भूमि को भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही यह जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध गतिविधि लंबे समय से चल रही है, लेकिन खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब खदान का नाम और संचालक स्पष्ट हैं, तो फिर यमुना नदी के बीच तक रास्ता बनाकर खनन होने देना प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की आशंका को और गहरा करता है।
पर्यावरण नियमों और NGT के आदेशों के अनुसार, किसी भी नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकना, नदी क्षेत्र में रास्ता बनाना और पेड़ों/मलबे के सहारे खनन करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यह सब खुलेआम किया जाना NGT आदेशों की सीधी अवहेलना है।

क्या NGT के आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं

कब होगी यमुना को नुकसान पहुंचाने वाले खनन संचालकों पर सख्त कार्रवाई

नदी और पर्यावरण को हुई क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा?

Balram Singh
India Now24

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