
बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर।
आज दिनांक।28/01/026को
यूजीसी के “काले कानून” के खिलाफ गाजीपुर में सवर्ण संगठनों का जोरदार विरोध प्रदर्शन

गाजीपुर।आज गाजीपुर जनपद में क्षत्रिय महासभा, ब्राह्मण जनसेवा मंच, पूर्वांचल छात्र सेना, कायस्थ महासभा, ब्राह्मण रक्षा दल, राष्ट्रवादी जन संग्रह एवं सवर्ण हिंद फौज के संयुक्त तत्वावधान में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा बनाए गए नियमों को “सवर्ण विरोधी काला कानून” बताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी द्वारा बनाए गए नियम समाज के एक वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण हैं और इससे शिक्षण संस्थानों में असंतुलन उत्पन्न होगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें,प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गईं—1. यूजीसी की निगरानी में गठित की जाने वाली किसी भी समिति में सवर्ण समाज के सदस्यों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
2. झूठी एवं दुर्भावना पूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ जुर्माना एवं दंड का स्पष्ट प्रावधान किया जाए।
3. यूजीसी द्वारा लागू किए गए इस कथित “काले कानून” को पूरी तरह वापस लिया जाए।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
विरोध प्रदर्शन में पूर्वांचल छात्र सेना के प्रदेश संयोजक निमेष पांडे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से शिवम उपाध्याय, अंशु पांडे, उमेश पांडे, गोपाल पांडे, अभिषेक तिवारी, विवेक तिवारी, मिट्ठू पांडे, चमचम चौबे, मनीष तिवारी, कृष्णानंद उपाध्याय, विवेकानंद पांडे, ऋषिकांत श्रीवास्तव, अरुण श्रीवास्तव, राजू उपाध्याय, अनूप उपाध्याय, सौरभ तिवारी, अजीत उपाध्याय, राहुल दुबे, अमित पांडे, अखिलेश पांडे, मोनू तिवारी, धनंजय मिश्रा, विराट पांडे, शिवम चौबे, राहुल तिवारी सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
वक्ताओं की श्रृंखला में प्रदेश संयोजक निमेष पांडे ने कहा कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि क्रमबद्ध और शांतिपूर्ण तरीके से लगातार जारी रहेगा। उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन की अगली कड़ी में 31 जनवरी को सरजू पांडे पार्क में विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि यूजीसी के इस नियम पर पुनर्विचार कर समाज के सभी वर्गों के हितों की रक्षा की जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



