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यह देश की स्थिति पर विचार करने का अवसर’, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश

यह देश की स्थिति पर विचार करने का अवसर’, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम  हम, भारत के लोग देश और विदेश में उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का यह पावन अवसर हमें हमारे देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की स्थिति और दिशा पर विचार करने का अवसर देता है।

हमारे स्वतंत्रता संग्राम की ताकत ने 15 अगस्त 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत स्वतंत्र हुआ। हम अपने राष्ट्र के भाग्य के स्वयं निर्माता बन गए। 26 जनवरी 1950 से हम अपने गणराज्य को सांविधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह लागू हुआ। भारत, जो लोकतंत्र की जन्मभूमि है, शासन प्रणाली से मुक्त हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला है। संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं। संविधान के निर्माता देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को संविधानिक प्रावधानों के माध्यम से मजबूत आधार प्रदान करने में सफल रहे हैं।

उन्होंने कहा, राष्ट्रीय महाकवि सब्रमण्यम भारती ने तमिल भाषा में ‘वंदे मातरम येन्बोम’ अर्थात ‘ हम वंदे मातरम बोलें’ इस गीत रचना करके वंदे मातरम की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस गीत के अनुवाद लोकप्रिय हुए। श्री ऑरबिंदो ने वंदे मातरम का अंग्रेजी अनुवाद किया। ऋषितुल्य बंकिंम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।   आज से दो दिन पहले यानी 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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