
बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर।
आज दिनांक।02/02/026को
मनरेगा बहाल करो, वीबीजी राम जी निरस्त करो,ग्रामीण मजदूरों के रोजगार पर सरकार का हमला बर्दाश्त नहीं — राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन

जखनियां (गाजीपुर)।उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन तथा सी०पी०आई०(एम) के नेतृत्व में ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक जोरदार पहल की गई। यूनियन द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वी बी जी राम जी कानून के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी जखनियां के माध्यम से सौंपा गया।यूनियन ने ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा ही ग्रामीण मजदूरों के लिए सबसे उपयुक्त और गारंटी आधारित कानून है, क्योंकि यह मांग आधारित है और रोजगार की संवैधानिक गारंटी देता है। इसके विपरीत, वीबीजी राम जी कानून में रोजगार की कोई ठोस गारंटी नहीं है और 125 दिन रोजगार देने की घोषणा केवल जुमला प्रतीत होती है।यूनियन ने आरोप लगाया कि वी बी जी राम जी के कुल बजट का 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर डाल दिया गया है, जबकि अधिकांश राज्य पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह कानून ज़मीन पर लागू होना लगभग असंभव है, जिसका सीधा असर ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा। इससे बेरोज़गारी, पलायन और भुखमरी जैसी समस्याएं और गंभीर होंगी।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मनरेगा के तहत काम के दौरान दुर्घटना होने पर मजदूरों को मुआवजे की व्यवस्था है, जबकि वीबीजी राम जी कानून में ऐसी किसी गारंटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जो मजदूरों के जीवन और सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ है।यूनियन ने राष्ट्रपती से निम्नलिखित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की— मनरेगा को तुरंत बहाल किया जाए और उसका वार्षिक बजट बढ़ाकर तीन लाख करोड़ रुपये किया जाए।मनरेगा के तहत साल में 200 दिन रोजगार तथा 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दर घोषित की जाए और लंबित मजदूरी का भुगतान तुरंत कराया जाए।वीबीजी राम जी कानून पर तत्काल रोक लगाकर उसे निरस्त किया जाए।यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार एवं शासन-प्रशासन की होगी।इस अवसर पर विजय बहादुर सिंह, पिंटू यादव, सुरेंद्र भारती, मुंशी, लक्ष्मीना सहित अनेक ग्रामीण मजदूर नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में नारा बुलंद किया।



