फतेहपुर में सत्ता का संदेश: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर फोड़ा ‘मैसेज बम’

फतेहपुर में सत्ता का संदेश: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर फोड़ा ‘मैसेज बम’
फतेहपुर में शिक्षा और सशक्तिकरण का संदेश
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का ऐतिहासिक दौरा

फतेहपुर में सोमवार को जो हुआ,वो सिर्फ़ एक सरकारी दौरा नहीं था—वो एक सियासी, सामाजिक और शैक्षिक मैसेज बम था। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जैसे ही सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पहुंचीं,पूरा इलाका हाई अलर्ट पर चला गया।हज़ारों की भीड़,कड़ी सुरक्षा,मंच पर सत्ता का संदेश और सामने बैठा भविष्य—यानी छात्र-छात्राएं। सवाल ये नहीं कि कार्यक्रम क्या था,सवाल ये है कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर सत्ता का इरादा कितना गंभीर है?
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट, टॉपर्स को सम्मान और मंच से बड़ा ऐलान—महिलाओं के बिना विकसित भारत अधूरा!
लेकिन क्या ये संदेश भाषण तक सीमित रहेगा या ज़मीन पर बदलेगी तस्वीर
फतेहपुर। जिले के सदर तहसील क्षेत्र स्थित वीआईपी रोड पर सोमवार का दिन शिक्षा,संस्कार और महिला सशक्तिकरण के नाम रहा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आगमन से सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज का परिसर उत्सव स्थल में तब्दील हो गया। अवसर था विद्यालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण का—और मंच से निकला संदेश साफ था: शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं,राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल लगभग सवा दो घंटे तक विद्यालय परिसर में रहीं।भव्य साज-सज्जा, करीब 5,000 लोगों के बैठने की समुचित व्यवस्था और चाक-चौबंद सुरक्षा ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। लोकार्पण के बाद राज्यपाल ने महिलाओं से संवाद किया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट वितरित कर उनके योगदान को समाज की नींव बताया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और संस्कार ही असली पूंजी हैं।महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी है।यह बात सुनकर सभागार में मौजूद अभिभावकों,शिक्षकों और छात्र-छात्राओं में नई ऊर्जा देखने को मिली।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा किताबों से आगे बढ़कर आत्मविश्वास,अनुशासन और रचनात्मकता का संगम है।कार्यक्रम के दौरान यूपी टॉपर रहे मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच से यही संदेश गया—मेहनत+अनुशासन+शिक्षा=सफलता।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं,बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।अगर हम चाहते हैं कि हमारे गांव,कस्बे और जिले आगे बढ़ें—तो बेटियों की पढ़ाई,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान और स्कूलों की मजबूती को प्राथमिकता देनी होगी।
कार्यक्रम के समापन पर यह साफ हो गया कि फतेहपुर में शिक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश गया है—परंपरा,संस्कार और आधुनिक सोच साथ चलें,तभी भविष्य सुरक्षित होगा। राज्यपाल का यह दौरा जिले के शैक्षिक इतिहास में एक प्रेरक अध्याय बनकर दर्ज हो गया।
तो फतेहपुर की धरती से शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का जो संदेश दिया गया,वो सिर्फ़ मंच तक सीमित नहीं रहा—उसने सवाल भी छोड़े और उम्मीद भी जगाई।राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के शब्द साफ थे:शिक्षा और संस्कार ही समाज की असली ताक़त हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये संदेश फाइलों से निकलकर गांव, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों तक कितनी तेजी से पहुंचेगा।
Balram Singh
India Now24



