फतेहपुर : चार्ज मिलते ही सचिव का ‘सिस्टम गेम’ तेज!कोर्रा कनक में जनता त्रस्त, पंचायत बनी निजी जागीर

चार्ज मिलते ही सचिव का ‘सिस्टम गेम’ तेज!कोर्रा कनक में जनता त्रस्त, पंचायत बनी निजी जागीर
काग़ज़ों में दौड़ी योजनाएं, ज़मीन पर नाममात्र काम—पंचायत में कथित भ्रष्टाचार की गूंज
रसूख, प्रोटोकॉल और सत्ता की छाया—क्या संरक्षण में पल रहा है पंचायत का खेल
फतेहपुर ।असोथर ब्लॉक की ग्राम पंचायत कोर्रा कनक इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि पंचायत सचिव की कथित मनमानी, दबंग कार्यशैली और सिस्टमबाज़ी को लेकर चर्चा में है। सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले साल सितम्बर माह में चार्ज संभालने वाले सचिव ने पदभार ग्रहण करते ही पंचायत व्यवस्था को निजी नियंत्रण में लेने की कोशिश शुरू कर दी है।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रमाण पत्र, भुगतान, योजनाओं से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बिना “ सिस्टम पूरा किए ” कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती, जिससे आम जनता परेशान और खुद को बेबस महसूस कर रही है।
मृतक आश्रित नौकरी, सत्ता का रसूख—और बढ़ता प्रोटोकॉल क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, सचिव को उनकी पत्नी की जगह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली है , जिसके बाद से उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सचिव पंचायत में अपने पिता की लग्ज़री गाड़ी से, पूरे कथित प्रोटोकॉल के साथ पहुंचते हैं और आम ग्रामीणों के साथ व्यवहार में दूरी साफ नजर आती है।कुछ जानकारों का कहना है कि पिता के सत्ता से जुड़े होने की चर्चा के चलते सचिव खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान रहे हैं, जिस कारण पंचायत में नियम-कानून से ज्यादा दबदबा और रसूख हावी होता दिख रहा है। हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
पंचवर्षीय योजनाएं: काग़ज़ों में पूरी, ज़मीन पर अधूरी ग्रामीणों और सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पंचवर्षीय योजनाओं के नाम पर अधिकांश कार्य सिर्फ काग़ज़ों में पूरे दिखाए गए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि“ जमीन पर मुश्किल से दस प्रतिशत काम दिखाई देता है, बाकी सरकारी योजनाओं की राशि कहां गई, यह जांच का विषय है। ”ग्रामीणों के अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई योजनाओं की हकीकत सामने आ सकती है।
योगी सरकार की सख्ती बनाम जमीनी हकीकत एक ओर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर कुछ लोग कथित तौर पर सरकारी संरक्षण में खुद को सुरक्षित मानते हुए खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय व्यक्तिगत ऐशो-आराम और व्यवस्थाओं में खर्च होने की चर्चा आम है।जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या असोथर और बहुआ ब्लॉक की अन्य पंचायतों में भी इसी तरह का सिस्टम चल रहा है?क्या जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों से अनजान हैं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी खामोश हैं?जनता पूछ रही सवाल कोर्रा कनक की जनता अब खुलकर सवाल कर रही है—क्या ऐसे कथित सिस्टमबाज़ सचिव पर कभी कार्रवाई होगी?या फिर पंचायतों में बैठे कुछ लोग नौकरी को विरासत समझकर जनता को यूं ही परेशान करते रहेंगे?फिलहाल, पूरे मामले में निगाहें जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं।क्या होगी निष्पक्ष जांच?या फिर यह मामला भी काग़ज़ों और फाइलों में दबकर रह जाएगा l
Balram Singh
India Now24



