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दुल्लहपुर में अवैध हॉस्पिटल का काला सच उजागर: ऑपरेशन के दौरान विवाहिता की मौत, परिजन मुआवज़े पर अड़े – स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बेनक़ाब

बेद प्रकाश पाण्डेय ब्यूरो चीफ गाजीपुर।

आज दिनांक।19/11/025को

 

दुल्लहपुर में अवैध हॉस्पिटल का काला सच उजागर: ऑपरेशन के दौरान विवाहिता की मौत, परिजन मुआवज़े पर अड़े – स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बेनक़ाब

दुल्लहपुर/जलालाबाद – क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की भयावह वास्तविकता एक बार फिर सामने आई है। बताया जा रहा है कि जलालाबाद पेट्रोल पंप के सामने जय पोहारी बाबा, हरदासपुर खुर्द में बिना बोर्ड, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना किसी डिग्रीधारक डॉक्टर के चल रहे अस्पताल में 40 वर्षीय नीलम कुमारी पत्नी संजय कुमार (निवासी – हरदासपुर खुर्द) की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।बिना मान्यता वाले अस्पताल में हुआ ऑपरेशन, बिगड़ी तबीयत-मंगलवार को नीलम कुमारी का बच्चेदानी का ऑपरेशन इसी अवैध अस्पताल में किया गया। अस्पताल कर्मचारियों ने परिवार को आश्वस्त करते हुए बताया कि ऑपरेशन सफल रहा। लेकिन बुधवार सुबह नीलम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। अस्पताल में मौजूद सुनीता कुशवाहा ने परिजनों को यह कहते हुए मरीज को बाहर ले जाने को कहा कि हालत गंभीर है।परिजन नीलम को लेकर मऊ जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि नीलम ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया था, पर अस्पताल वालों ने उन्हें गुमराह किया।

परिजनों का आरोप – बिना सहमति किया गया ऑपरेशन

परिवारजन का कहना है कि बिना सहमति ऑपरेशन कर दिया गया। वहीं अस्पताल संचालक सुनीता कुशवाहा का दावा है कि ऑपरेशन सहमति के साथ हुआ था।सबसे चौंकाने वाली बात यह कि अस्पताल के पास न तो कोई रजिस्ट्रेशन था और न ही कोई MBBS/सर्जन डॉक्टर — यह बात स्वयं संचालिका ने स्वीकार की।

हंगामा, सड़क जाम की कोशिश, मुआवज़े की मांग पर अड़े परिजन

मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण अस्पताल के सामने नीलम का शव रखकर हंगामा करने लगे। सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मृतका के पास एक बेटा शुभम और एक बेटी है।परिजन लगातार मुआवज़े की मांग कर रहे थे और कई बार सड़क जाम करने का प्रयास भी किया। दुल्लहपुर पुलिस मौके पर मौजूद रही और लोगों को समझाती रही। बताया जाता है कि दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल संचालक और परिजनों के बीच किसी प्रकार की बातचीत हुई, जिसके बाद परिवार शव को अपने साथ ले गया और पुलिस ने शव को कब्जे में नहीं लिया।

सबसे बड़ा सवाल – स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा था?

यह घटना कई चुभते सवाल खड़े करती है—बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल का वर्षों से संचालन-बिना किसी डिग्रीधारक “डॉक्टर” द्वारा बड़े ऑपरेशन-मौत के बाद स्थिति छिपाने की कोशिश-स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही-क्षेत्र में कई ऐसे अवैध अस्पतालों का मनमाने ढंग से संचालन-अक्सर कार्रवाई सिर्फ तब होती है जब कोई बड़ी घटना सामने आ जाती है। अन्यथा स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदकर बैठा रहता है, और ऐसी जानलेवा घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहती है।

निष्कर्ष,दुल्लहपुर में हुई यह दर्दनाक घटना अवैध अस्पतालों के खतरे और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब सवाल यह है कि कब तक बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल जनता की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे और जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे रहेगा?

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